दुनिया के सात आश्चर्यों में शामिल चीन की दीवार के बारे में तो आप जानते होंगे लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में भी ऐसी ही एक दीवार है। हांलाकि ये दीवार चीन जितनी लम्बी तो नहीं लेकिन चीन के बाद  ये दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार है।मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 200 किमी दूर रायसेन जिले के गोरखपुर गांव में 10 वीं 11 वीं शताब्दी में बनी दीवार के अवशेष मिले हैं। इस दीवार की लंबाई 80 किमी से भी ज्यादा है। यह गोरखपर गांव से शुरू होकर कई गांवों से होते हुए बाड़ी के चौकीगढ़ किले तक जाती है।

पुरातत्वविदों और वास्तुविदों का मानना है कि इस दीवार का निर्माण 10वीं और 11वीं शताब्दी के बीच परमार वंश के राजाओं ने बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा के लिए करवाया था। विंध्याचल पर्वत श्रंखला के बीच बनी इस दीवार की ऊंचाई 15 से 18 फीट और चौड़ाई 10 से से 15 फीट है। बीच बीच में यह दीवार कई जगह टूटी है। लाल बलुआ पत्थरों से बनी इस विशाल में जुड़ाई के लिए चूने या गारे का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इन चोकोर पत्थरों में त्रिकोण आकार के खांचे बने हैं जिनसे पत्थरों की इंटरलॉकिंग की गई है। दीवारों के बीच में पत्थर, कंकड़ और मिट्टी का भराव किया गया है।

पुरातत्वविद डॉ. नारायण व्यास ने बताया कि गोरखपुर गांव से आगे नरसिंहपुर और जबलपुर, 10-11 वीं सदी के दौरान कल्चुरी शासकों के अंतर्गत आता था। परमार और कल्चुरी शासकों में आपस में युद्ध हुआ करते थे। कल्चुरी शासकों के हमलों से बचने के लिए परमार शासकों ने ही शायद इतनी ऊंची दीवार का निर्माण करवाया था। यह भी पढ़ें: न्यूटन के ख़तों से हुआ खुलासा, 2060 में खत्म हो जाएगी दुनिया

गौरतलब है कि इससे पहले कुम्भलगढ़ के किले की दीवार को चीन की दीवार के बाद दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार माना जाता था। इसकी लंबाई 36 किमी है।

इस दीवार के आस पास सूर्य, शिव और भैरव के मंदिर, कई प्राचीन मूर्तियां और एक पुराना तालाब भी मिला है। भारतीय पुरात्तव विभाग की एक टीम ने यहां पहुंचकर पूरे इलाके जायजा लिया और मसौदा तैयार कर संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय को भेज दिया गया है। जल्द ही पुरातत्व विभाग की ओर से यहां संरक्षण का काम शुरू कर दिया जाएगा।