मुंबई। भारतीय जनता पार्टी पर शिवसेना के हमलों का दौर खत्म नहीं हुआ है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के मेल-मिलाप की कोशिशों को शिवसेना ने खारिज कर दिया. शिवसेना ने आज कहा कि ‘मोदी की बाढ़’ में भले ही सांप और नेवले बह गए हों , लेकिन बाघ को वश में नहीं किया जा सकता. शिवसेना ने अगला लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने की मंशा जाहिर की. भाजपा पर तीखा हमला करते हुए पार्टी ने कहा कि वह 2014 के स्वर्ण युग में अब भी रह रही है जबकि 2019 की तस्वीर बिल्कुल अलग होगी.

बीजेपी पर तीखा हमला

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना ’ में अपने संपादकीय में शिवसेना ने कहा कि भाजपा 2014 में सत्ता में आने के बाद विनम्रता भूल गई है , लेकिन उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उप चुनाव में हारने के बाद कुछ सोचने लगी है. इन दोनों सीटों पर 2014 के लोकसभा उपचुनाव में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जीत हासिल की थी.

सामना के संपादकीय में कहा गया है कि भाजपा को मित्रों की जरूरत नहीं है. वे मजबूत और आत्मनिर्भर हैं. संपादकीय में कहा गया है कि उनकी पंखहीन उड़ान आकाश में उड़ी और उड़ती रही. अब वे जमीन पर उतरना चाहते हैं , लेकिन उतरने के लिये कोई जगह नहीं है. भाजपा को स्वर्ण युग के बारे में सपने देखने दें और हम उन्हें शुभकामना देते हैं.

बीजेपी-शिवसेना में ऐसे पड़ी दरार

शिवसेना और भाजपा ने 2014 का लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था , लेकिन उसी साल अक्तूबर में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया. भाजपा नीत सरकार राज्य में अक्तूबर 2014 में सत्ता में आई थी , जबकि शिवसेना उस साल दिसंबर में सरकार में शामिल हुई थी.

बता दें कि शिवसेना ने पिछले साल एनडीए से अलग होने का फैसला लिया था. पार्टी का आरोप था कि बीजेपी की तरफ से उसे उचित तवज्जो नहीं मिल रही है और उसे लगातार अपमानित किया जा रहा है. दोनों पार्टियों में महाराष्ट्र विधानसभा के समय ही मतभेद का बीज पड़ गया था. धीरे धीरे दरार इतनी चौड़ी हो गई कि शिवसेना ने एनडीए से ही अलग होने का फैसला कर लिया.