नई दिल्ली: दिल्ली में चल रहे सीलिंग अभियान को लेकर अपना विरोध जताने के लिए व्यापारियों ने बुधवार को अपनी दुकानें बंद रखीं जिससे शहर के अधिकतर प्रमुख बाजार बंद रहे. इस बीच सीलिंग अभियान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की खिंचाई की और कहा कि डीडीए को शहर के आम आदमी नहीं बल्कि केवल व्यापारियों को लेकर चिंता है. न्यायालय ने कहा कि डीडीए तब तक लोगों पर ध्यान नहीं देता जब तक वे सड़कों पर नहीं उतरते.

व्यापारी संगठन के नेताओं ने बताया कि बहुत सारे व्यापारी, उनके परिवार के लोग और कर्मचारी अपनी आजीविका पर हमले को लेकर अपना विरोध जताने के लिए एक बड़ी रैली में हिस्सा लेने की खातिर दिल्ली के रामलीला मैदान में जमा हुए. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, ‘‘हजारों व्यापारी हड़ताल में हिस्सा ले रहे हैं और शहर के सभी बाजारों में दुकानें बंद हैं.’’

बुधवार को हुई हड़ताल सीएआईटी और ऑल दिल्ली ट्रेडर्स एंड वर्कर्स एसोसिएशन ने बुलाई थी. बंद किए गए बाजारों में सदर बाजार, लाजपत नगर, चांदनी चौक, करोल बाग और चावड़ी बाजार शामिल हैं. खंडेलवाल ने कहा कि सीलिंग अभियान से व्यापारियों, उनके कर्मचारियों और परिवार के लोगों सहित 40 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. उन्होंने दावा किया कि शहर में करीब 7 लाख करोबारी प्रतिष्ठान और 3 हजार बाजार हड़ताल से प्रभावित रहे.

खंडेलवाल ने कहा कि एक अनुमान के अनुसार, पिछले तीन माह में दिल्ली में सीलिंग की वजह से कारोबार में 40 फीसदी की गिरावट आई है. बुधवार की हड़ताल के कारण 1,800 करोड़ रुपये के कारोबार का नुकसान हुआ है. उच्चतम न्यायलय द्वारा गठित निगरानी समिति के निर्देश पर नगर निगमों ने दिल्ली के मास्टर प्लान का उल्लंघन करने के लिए सीलिंग अभियान चलाया है जिसके तहत बड़ी संख्या में व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सील किया गया है.