नई दिल्लीः राज्यसभा में बीएसपी के उम्मीदवार डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को न जीता पाने का मलाल समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को है. शायद यही कारण है कि उन्होंने एमएलसी सीट बीएसपी के इस नेता को ऑफर की है. उत्तर प्रदेश की 13 विधान परिषद सीटों के लिए 26 अप्रैल को चुनाव होंगे और इसी दिन रिजल्ट की भी घोषणा होगी. परिषद की 13 सीटों के लिए 9 से 16 अप्रैल तक नामांकन होंगे, जबकि मतदान 26 अप्रैल को होगा.

कुल 100 सदस्यों वाली यूपी विधान परिषद में 38 सीटों पर विधायक वोट करते हैं. इनमें से 13 सीटों पर फिलहाल चुनाव होने हैं. दरअसल, 5 मई को इनमें से 12 विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है और एक सीट पहले से ही खाली है. सूबे में कुल 100 विधान परिषद सदस्य हैं. इनमें से 38 विधान परिषद सदस्यों यानी एमएलसी का चयन विधायकों द्वारा होता है. 36 विधान परिषद सीटें ऐसी हैं जो स्थानीय निकाय द्वारा निर्वाचित होती हैं. इसके अलावा 8 सदस्यों का चुनाव शिक्षकों द्वारा और 8 सदस्य स्नातक सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं. वहीं 10 विधान परिषद सदस्य मनोनीत किए जाते हैं.

11 सीट पर बीजेपी की जीत पक्की
इन सभी सदस्यों का कार्यकाल 6 साल के लिए होता है. विधायकों द्वारा चुने जाने वाले विधान परिषद सदस्यों में से एक तिहाई सदस्य हर दो साल पर चुने जाते हैं. विधान परिषद की जिन 13 सीटों का चुनाव है, वो विधायकों द्वारा चुने जाने हैं. एक सीट के लिए करीब 29 वोट की जरूरत होगी. सूबे की मौजूदा विधानसभा में बीजेपी गठबंधन के पास 324 विधायक हैं. ऐसे में बीजेपी की 11 सीट पर जीत तय है.

क्या है बीएसपी की जीत का गणित
अगर समाजवादी पार्टी की बात करें तो उसके 47 विधायक हैं. एक सीट पर जीत पक्की है. इसके बाद उसके 17 विधायक बचेंगे. बचे विधायकों के वोट सपा बीएसपी को देगी, बीएसपी के पास 18 विधायक हैं. ऐसे में समजवादी पार्टी ने सुझाव दिया है कि मायावती एक बार फिर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को ही टिकट दे. बीएसपी को एक सीट हासिल करने के लिए कांग्रेस और आरएलडी के वोटों की भी जरूरत नहीं पड़ेगी.

क्या कहना है सपा का
हमारे सहयोगी अखबार डीएनए से बातचीत में सपा के एमएलसी और प्रवक्ता सुनील साजन ने कहा कि हमने एक सीट बीएसपी को ऑफर की है. 2019 से पहले हम गठबंधन को और मजबूत करना चाहते हैं. हमने राज्यसभा चुनाव से सबक सीखा है. इस बार हम पहले बीएसपी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करेंगे.