नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गोवा की एक अदालत को निर्देश दिया कि तहलका मैगजीन के संस्थापक संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ रेप के आरोप में चल रहे मुकदमे की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी की जाए. शीर्ष कोर्ट ने तेजपाल से कहा कि बलात्कार के आरोपों को निरस्त करने के लिए दायर उनकी याचिका बंबईहाई कोर्ट द्वारा खारिज करने के 20 दिसंबर , 2017 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की प्रति गोवा सरकार को दी जाए.

जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने इस निर्देश के साथ ही तेजपाल की याचिका 24 अप्रैल के लिए स्थगित कर दी. इस बीच गोवा सरकार को तेजपाल की याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश भी पीठ ने दिया है. ब ता दें कि तेजपाल पर अपनी पूर्व महिला सहयोगी से कथित रूप से बलात्कार का मामला दर्ज है.

याचिका पर सुनवाई के दौरान तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि पीड़ित द्वारा दर्ज कराए गए बयानों और सीसीटीवी फुटेज में अनेक विसंगतियां हैं, परंतु निचली अदालत ने उन पर विचार नहीं किया है. सिब्बल ने मोबाइल फोन की क्लोन प्रति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कोर्ट के आदेश पर दो साल बाद उन्हें यह मुहैया कराई गई है. बेंच ने सिब्बल द्वारा पेश दस्तावेज के देखने के बाद कहा कि निचली अदालत साक्ष्य दर्ज करते समय इस पर विचार करेगी.

ये है मामला
तेजपाल पर अपनी पूर्व महिला सहयोगी का 2013 में गोवा के एक फाइव स्टार होटल की लिफ्ट के अंदर यौन उत्पीड़न करने का आरोप है. तेजपाल को गोवा पुलिस की अपराध शाखा ने 30 नवंबर , 2013 को गिरफ्तार किया था और बाद में मई 2014 में वह जमानत पर रिहा हुए. गोवा के मापूसा टाउन की अदालत ने तरुण तेजपाल के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न और बलात्कार से संबंधित प्रावधानों सहित आईपीसी की कई धाराओं के तहत अभियोग तय किए हैं. (इनपुट – एजेंसी)