नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि आधार बैंकिंग धोखाधड़ियों को रोकने के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर सकता. शीर्ष अदालत ने केवल कुछ आतंकवादियों को पकड़ने के लिए पूरी जनता से अपने मोबाइल फोन आधार से जोड़ने के लिए कहने पर केंद्र पर सवाल खड़े किए. शीर्ष अदालत ने कहा कि बैंक अधिकारियों की धोखाधड़ी करने वालों से साठगांठ होती है. अदालत ने कहा कि ऐसा नहीं है कि घोटाले इसलिए होते हैं क्योंकि अपराधी अज्ञात होते हैं.

केंद्र की दलील से सहमत नहीं सुप्रीम कोर्ट

अदालत ने ये टिप्पणियां उस समय कीं जब केन्द्र ने दलील दी कि आधार आतंकवाद और बैंक संबंधी धोखाधड़ी जैसी समस्याओं पर रोक लगाने में मदद करेगा. अदालत ने सवाल किया कि अगर कल को अधिकारी प्रशासनिक आदेशों के जरिये नागरिकों से आधार के तहत डीएनए और रक्त के नमूने देने के लिए कहने लगें तो क्या होगा. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने आधार और इसके 2016 के कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केन्द्र की दलील पर पहली नजर में असहमति जताई और कहा कि आधार बैंकिंग धोखाधड़ी का समाधान नहीं है.

आज से घर बैठे लिंक करें अपना फोन नंबर आधार से

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पीठ ने कहा, धोखाधड़ी करने वालों की पहचान के बारे में कोई संदेह नहीं है. बैंक जानती है कि वह किसे कर्ज दे रही है और बैंक अधिकारियों की धोखाधड़ी करने वालों से साठगांठ होती है. आधार इसे रोकने के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर सकता. इस पीठ में न्यायमूर्ति ए के सीकरी, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण भी शामिल थे.

पीठ ने सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल से कहा कि बैंकिंग धोखाधड़ी कई पहचान पत्रों के कारण नहीं होता है. पीठ ने कहा कि आधार मनरेगा जैसी योजनाओं के फर्जी लाभार्थियों को खोज निकालने में अधिकारियों की मदद कर सकता है.

वहीं, केन्द्र का कहना है कि बायोमैट्रिक्स सुरक्षित हैं और ये मनी लॉन्डरिंग, बैंक धोखाधड़ी, आयकर चोरी और आतंकवाद जैसी समस्याओं का समाधान कर सकती है. बता दें कि केंद्र सरकार ने योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार अनिवार्य किया है. इसके अलावा बैंक अकाउंट, फोन नंबर, पैन से भी आधार जरूरी करने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट में आधार की वैधता को चुनौती दी गई है.

(भाषा इनपुट)