नई दिल्ली: बाघों की घटती संख्या के मद्देनजर उनकी सुरक्षा के लिए अनुरोध से जुड़ी एक याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने आज केंद्र तथा अन्य से जवाब मांगा. न्यायालय की एक पीठ ने याचिका पर पर्यावरण मंत्रालय, राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को नोटिस जारी किया. इस पीठ में प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा के अलावा न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर तथा न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ भी हैं.

मालिक की जान खतरे में देख बाघ से भिड़ गया कुत्ता

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याचिका में बाघ अभयारण्यों के पास रह रहे लोगों के पुनर्वास का भी अनुरोध किया गया है. यह याचिका अधिवक्ता अनुपम त्रिपाठी ने दायर की है. याचिका में कहा गया है कि बाघ या तो अधिकारियों या स्थानीय लोगों द्वारा जहर देकर मारे जा रहे हैं या उन्हें वन रक्षकों द्वारा गोली मारी जा रही है या वे शिकारियों द्वारा मारे जा रहे हैं.

याचिका में देश भर के हर बाघ अभयारण्य में नियमित रूप से उनकी गिनती कराने का अनुरोध किया गया है. इस जनहित याचिका में दावा किया गया है कि राज्य बाघों तथा अन्य वन्य जीवों के लिए पर्यावरण में सुधार और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है. लेकिन बाघों की हत्या के बारे में अब तक के आंकड़े बताते हैं कि वह ऐसा करने में असफल रहा है.