नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर के कठुआ गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्वत: संज्ञान ले लिया है. कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया, जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन और कठुआ बार एसोसिएशन को नोटिस भेज कर 19 अप्रैल तक जवाब मांगा है. कोर्ट ने पूछा है कि इस मामले में वकील, पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा क्यों पड़ रहे हैं? कोर्ट ने कहा है कि किसी भी वकील बार एसोसिएशन को न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने का हक नहीं है.

कठुआ मामले में गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इंडिया गेट पर भी केंडल मार्च निकाला था. उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी. राहुल ने प्रधानमंत्री से सवाल किया था कि वह महिलाओं को क्यों नहीं सुरक्षा दे पा रहे हैं. उन्होंने कहा था कि मोदी इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ें.

क्या है कठुआ मामला
जिले के रसाना में दो समुदायों की लड़ाई में एक देवस्थान के केयरटेकर ने अपने बेटे, भतीजे और कुछ पुलिस वालों के साथ मिलकर 8 साल की लड़की का पहले अपहरण और फिर गैंगरेप को अंजाम दिया. इस मामले में पुलिस के अधिकारी भी शामिल हैं. लड़की को सात दिन तक देवस्थान पर ही रखा गया था और कई बार उसके साथ रेप किया गया. लड़की की छत-विक्षत लाश मिलने पर लोगों ने प्रदर्शन किया और सरकार पर दबाव बनाया. बाद में क्राइम ब्रांच को मामला दे दिया गया.

क्राइम ब्रांच की टीम ने मामले का खुलासा करते हुए 8 लोगों को गिरफ्तार किया. लेकिन कुछ क्षेत्रीय लोग, वकीलों का एक समुह और कुछ राजनैतिक लोग आरोपियों के साथ खड़े हो गए हैं. वे आरोपियों की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.