सीबीएसई पेपर लीक मामले की जांच दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश से होते हुए हिमाचल प्रदेश पहुंच गई है. जांच कर रही टीम ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. इसमें एक टीचर, एक क्लर्क और एक सपोर्ट स्टाफ शामिल हैं. सभी पर क्लास 12 इकॉनमिक्स पेपर लीक में शामिल होने का आरोप हैं. बता दें कि ये पेपर हैंडिव्रिटेन (हाथ से लिखा हुआ) लीक हुआ था.

बता दें कि इससे पहले क्राइम ब्रांच ने दो टीचर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था. दोनों टीचर बाहरी दिल्ली के हैं. गिरफ्तार लोगों में ऋषभ और रोहति स्कूल में टीचर हैं. वहीं, तौकीर ट्यूशन टीचर है. पुलिस के मुताबिक ऋषभ और रोहित ने 12वीं का इकोनॉमिक्स का पेपर तौकीर को दिया था, जिसे तौकीर ने स्टूडेंट्स के बीच लीक कर दिया. जानकारी मिली है कि पेपर एग्जाम के आधे घंटे पहले प्रिंटेड फॉर्म में लीक हुआ था.

5 साल से दोस्त थे आरोपी
दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने दो शिक्षकों और एक ट्यूशन टीचर को पुलिस कस्टडी में भेज दिया था. इस मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कोर्ट से तीनों आरोपियों को पुलिस कस्टडी में भेजने की मांग की थी जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया था. जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि तीनों लोग पिछले चार-पांच वर्षों से मित्र थे. एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने 10 व्हाट्सऐप नम्बरों के आधार पर तौकीर पर ध्यान केंद्रित किया. इन नम्बरों का इस्तेमाल लीक पेपर को फैलाने के लिए किया गया था. पुलिस ने बताया कि व्हाट्सऐप के जरिए फैलाए गए पेपर में एक लोकेशन कोड था जिसका उस प्राइवेट स्कूल को आवंटित कोड से मिलान हो गया, जहां से पेपर लीक हुआ था.

सीबीएसई अधिकारी हो चुका निलंबित
दूसरी तरफ स्कूल शिक्षा सचिव अनिल स्वरूप ने सीबीएसई अधिकारी के. एस राणा को पेपर लीक मामले में परीक्षा केंद्र की निगरानी में ढिलाई बरतने के चलते निलंबित कर दिया था. उन्होंने कहा था, ‘‘मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर द्वारा दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के निर्देश पर बोर्ड ने के. एस राणा द्वारा परीक्षा केंद्र (0859) की निगरानी में ढिलाई पाई और उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. एक औपचारिक जांच भी शुरू कर दी गई है.’’