लखनऊ। उन्नाव गैंगरेप मामले की जांच कर रही सीबीआई ने आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को गिरफ्तार कर लिया है. शुक्रवार को सीबीआई ने उन्हें हिरासत में लेकर लगातार 15 घंटे तक पूछताछ की. इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. सेंगर की गिरफ्तारी नहीं होने पर योगी सरकार और यूपी पुलिस की जमकर किरकिरी हो रही थी. राज्य के पुलिस प्रमुख ने सेंगर को माननीय विधायक से संबोधित कर यूपी पुलिस को आलोचनाओं के घेरे में ला दिया था. हाई कोर्ट में भी योगी सरकार ने दलील देते हुए कहा था कि पर्याप्त सबूतों के अभाव में सेंगर को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तुरंत गिरफ्तारी को कहा था

शुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जांच अधिकारी/सीबीआई को उन्नाव बलात्कार मामले में आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और बाकीआरोपियों को अविलंब गिरफ्तार करने और सीआरपीसी के प्रावधानों के तहत तय समय सीमा के भीतर जांच करने का आज निर्देश दिया. महज एफआईआर के आधार पर विधायक को गिरफ्तार नहीं करने के राज्य सरकार के रुख को हाई कोर्ट ने भयावह बताते हुए कहा कि यह अदालत की जमीर को झकझोर देने वाला है.

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अदालत ने कहा था कि सीबीआई यह विचार भी कर सकती है कि निष्पक्ष जांच के लिए 2017 की अपराध संख्या 0316 में सभी आरोपियों की जमानत रद्द करना कहीं आवश्यक तो नहीं है. जांच अधिकारी/सीबीआई 2 मई, 2018 को सुबह 10 बजे इस अदालत के समक्ष स्थिति रिपोर्ट पेश करेंगे. अपने 20 पेज के फैसले में अदालत ने अधिकारियों की निष्क्रियता और महाधिवक्ता के रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले की तकलीफदेह बात यह है कि कानून व्यवस्था की स्थिति बहाल रखने वाले प्राधिकारी और सरकारी अधिकारी मिले हुए थे और कुलदीप सिंह के प्रभाव में थे.

अदालत ने कहा कि डाक्टर ने पीड़िता की जांच नहीं की और न ही सफीपुर के क्षेत्राधिकारी ने मुकदमा दर्ज किया. वहीं पीड़िता की हस्तलिखित शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय से भेजी गई. मामूली जुर्म पर पीड़िता के पिता को कुलदीप के भाई और गुंडों द्वारा पीटा गया और उसे गिरफ्तार कर हिरासत में बेरहमी से पीटा गया. ऐसा लगता है कि उसके परिजनों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए. अंततः पीड़िता के पिता की मौत हो गई.

सेंगर पर पॉक्सो के तहत केस दर्ज

विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और अन्य आरोपियों के खिलाफ 12 अप्रैल, 2018 को आईपीसी की धारा 363, 366, 376, 506 और पॉक्सो कानून की धारा तीन और चार के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. अदालत ने सीबीआई को 20 जून, 2017 को दर्ज आपराधिक मामले की आगे जांच करने/ जांच दोबारा खोलने का भी निर्देश दिया और साथ ही वर्ष 2018 के तीन अन्य आपराधिक मामलों की भी आगे जांच करने और निर्धारित समय सीमा में इसे निष्कर्ष पर पहुंचाने को कहा.

गुरुवार को अदालत ने महाधिवक्ता से पूछा था कि क्या राज्य सरकार ने बलात्कार के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर को गिरफ्तार करने का प्रस्ताव किया है. इस पर महाधिवक्ता ने जवाब दिया था कि वह इस संबंध में कोई बयान देने की स्थिति में नहीं हैं और पुलिस शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद ही कानून के मुताबिक अपना काम करेगी.

(एजेंसी इनपुट)