बीती 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हज़ार और पांच सौ रुपये के नोटों पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद देशभर में खलबली मची हुई है। बैंको और एटीम के बाहर कैश के लिये लंबी कतारे लगी हुई है। जो लोग ऑनलाइन बैंकिग का उपयोग बेहतर ढंग से कर पा रहे हैं उनके लिये हालात लगभग सामान्य ही है।

लेकिन उनका क्या होगा जिन्हे न एटीएम के बारे में पता है और न ही जिन्होंने पेटीएम के बारे में सुना है। खबर अलीगढ़ के एक छोटे से गांव से निकलकर सामने आई है आई है। जहां एक मजदूर को नोटबंदी के चलते मजबूरन नसबंदी करानी पड़ी। यह भी पढ़ें: PM मोदी ने आदित्य बिरला ग्रुप से ली 25 करोड़ रुपयों की रिश्वत: CM अरविंद केजरीवाल

सरकार लोगों की परेशानी कदम तो उठा रही है लेकिन समस्या इतनी ज़्यादा बड़ी है कि उसके सामने ये कदम काफी छोटे नज़र आ रहे हैं। नोटबंदी के बाद सामने निकलकर कई तरह की समस्याओं में से ये समस्या अपने आप में बड़ी बात है कि इस मजदूर ने कैश की किल्लत के चलते नसबंदी करवाली।

अपने परिवार के साथ पूरन
अपने परिवार के साथ पूरन

मामला उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का है। अलीगढ के ख़ैर थाना क्षेत्र के नहरौला गांव निवासी पूरन शर्मा ने पैसों के लिए नसबंदी कराने की बात कही है। पूरन मज़दूरी करते हैं लेकिन उन्होंने बताया कि इससे पहले तक सबकुछ ठीक चल रहा था लेकिन अचानक हुई नोटबंदी के बाद काम मिलना बंद हो गया। सामने रोज़ी-रोटी का संकट पैदा हो गया, न तो अब काम मिल रहा था और न ही पैसे। यह भी पढ़ें: कांग्रेस: PM मोदी को पता है कि अमित शाह ने काले धन से जमीनों का सौदा किया

ऐसे में उन्हें कहीं से पता चला कि नसबंदी करवाने पर सरकार दो हज़ार रुपए दे रही है। यह सुनकर पैसे की ख़ातिर दो बेटों और एक बेटी के पिता पूरन शर्मा अपनी पत्नी की नसबंदी करवाने के लिए अस्पताल पहुंचे लेकिन उनकी पत्नी मूक-बधिर हैं। जिसके चलते डॉक्टर ने उनकी पत्नी की नसबंदी करने से इनकार कर दिया और पूरन को ही नसबंदी कराने की सलाह दी। डॉक्टर की सलाह पर पूरन नसबंदी करवाने के लिये तैयार हो गए।

गांव के ही राजकरन तिवारी नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि पूरन की माली हालत काफी खस्ता है। वे काफी ग़रीब हैं और मज़दूरी करके जैसे-तैसे अपना परिवार चला पाते हैं। लेकिन नोटबंदी के बाद से उनके सामने एक काफी गंभीर समस्या पैदा हो गई है। उन्हे कोई और रास्ता नहीं सूझा जिसके चलते उन्हे नसबंदी करानी पड़ी