नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अपने फैसले में राज्य सरकार के उस फैसले को पलट दिया जिसमें सीबीएसई से जुड़े हुए राज्य के सभी स्कूलों में सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें ही पाठ्यक्रम में लगाने को अनिवार्य किया गया था. उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सीबीएसई से जुड़े हुए निजी स्कूलों को गैर-एनसीईआरटी पुस्तकें लागू करने की अनुमति दे दी लेकिन उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा कि उनकी कीमतें वाजिब होनी चाहिए.

प्रदेश के सीबीएसई स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ निजी स्कूलों, निजी प्रकाशकों और कई अन्य की याचिका पर अपने अंतरिम आदेश मे न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकल बेंच ने कहा कि सीबीएसई से जुड़े हुए निजी स्कूलों को अगर ठीक लगता है तो वे गैर-एनसीईआरटी पुस्तकें लागू करने या उन्हें उपयोग करने की सिफारिश कर सकते हैं.

हालांकि इस संबंध में पूर्व शर्त लगाते हुए अदालत ने कहा कि स्कूलों द्वारा लागू की गई निजी प्रकाशकों की ऐसी पुस्तकों की कीमत मनमानी नहीं होनी चाहिए. आदेश में यह भी कहा गया है कि इन पुस्तकों में सीबीएसई पाठयक्रम का अनुपालन होना चाहिए. अदालत ने निजी स्कूलों को अपने यहां लागू होने वाली गैर-एनसीईआरटी पुस्तकों की सूची कीमतों समेत राज्य सरकार और सीबीएसई को भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.

अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए तीन मई की तारीख तय की है. सभी वर्गों के छात्रों को कम कीमत पर पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए सभी सीबीएसई स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य करने के पीछे राज्य सरकार के इरादे की अदालत ने प्रशंसा की लेकिन कहा कि हर अच्छी चीज को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता.