इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राजेश और नुपूर तलवार को उनकी किशोरी बेटी आरुषि और घरेलू सहायक हेमराज के सनसनीखेज हत्या मामले में आज बरी कर दिया. घटना साल 2008 की है, अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता. खचाखच भरे अदालत कक्ष में फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और हालातों को ध्यान में रखते हुए दंत चिकित्सक दंपति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है.

न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र की खंडपीठ ये फैसला सुनाया. हाई कोर्ट ने तलवार दंपति के खिलाफ सबूतों को नाकाफी बताते हुए इन्हें बरी कर दिया. इसी के साथ ट्रायल कोर्ट की चार्जशीट खारिज हो चुकी है. कोर्ट का फैसला तलवार दंपति डॉ. राजेश तलवार और नुपुर तलवार के लिए बहुत बड़ी राहत हो जो 2013 से डासना जेल में बंद हैं. हाई कोर्ट ने कहा कि जांच में कई तरह की खामियां हैं. ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट भी इतनी कठोर सजा नहीं देता. संदेह के आधार पर दोनों को रिहा किया जाता है.  इन्हें जेल से तुरंत रिहा किया जाए.

डासना जेल के जेलर डीआर मौर्या ने बताया कि फैसले से तलवार दंपति खुश हैं और उन्होंने कहा कि हमें न्याय मिला है.

बताया जा रहा है कि जेल में इस फैसले की खबर सुनने के साथ ही राजेश और नुपुर तलवार भावुक हो उठे. राजेश तलवार अपनी बैरक में थे जबकि नुपुर तलवार अस्पताल कंपाउंड में थीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक गाजियाबाद के डासना जेल में बंद आरुषि के पिता डॉ. राजेश तलवार और मां नुपुर तलवार जेल की बैरक में ही फैसले का इंतजार कर रहे थे और पल पल की जानकारी टीवी के जरिए हासिल कर रहे थे. बताया जा रहा है कि फैसले से पहले तलवार दंपति इस कदर तनाव में दिखे कि सुबह का नाश्ता भी नहीं किया. गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने 26 नवंबर 2013 को राजेश और नुपुर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

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मई 2008 में तलवार दंपति के नोएडा स्थित आवास पर उनकी बेटी आरुषि अपने कमरे में मृत मिली थी. उसकी हत्या गला काटकर की गई थी. शुरुआत में शक की सुई 45 वर्षीय घरेलू सहायक हेमराज की ओर घूमी थी क्योंकि घटना के बाद से वह लापता था. लेकिन दो दिन बाद हेमराज का शव भी बिल्डिंग की छत से मिला था. इस मामले में लापरवाहीपूर्ण तरीके से जांच करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था. इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी थी.

तलवार दंपति को आजीवन कारावास 

इस मामले में आरोपी दंपती डा. राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने सीबीआइ कोर्ट गाजियाबाद की ओर से आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी. दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था.

उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इस हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपी थी. तभी से यह मामला कोर्ट में चल रहा है.सीबीआई ने सीधा सबूत न मिलने के कारण क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी. लेकिन सीबीआई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए तलवार दंपति के खिलाफ मुकदमा चलाया और उन्हें हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. तलवार दंपति ने इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.