नई दिल्‍ली: कर्नाटक में बीजेपी पर बढ़त बनाए दिख रही कांग्रेस  कीअब सत्‍ता की ट्रेन बेपटरी होते हुए दिखाई दे रही है. लिंगायत समुदाय को अलग धर्म को दर्जा देने का मुद्दा भुनाने की कोशिश करने वाली कांग्रेस एक बार फिर जाति की सियासत के मैदान में अपनी सत्‍ता वापसी को हाथ से खिसका हुआ देख रही है. कर्नाटक में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के कुछ समय पहले ही पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा की पार्टी जनता दल (एस) तेजी से बड़ा सरप्राइज बनकर उभरी है. लगभग एक दशक ये पार्टी राजनीतिक रूप से कमजोर रही है, लेकिन अचानक ही खबरों की सुर्खियों में छाई है. दरअसल, इसकी वजह ये है कि जेडीएस को दक्षिण कर्नाटक के प्रभावी वोक्कालिगा समुदाय से बड़ा समर्थन मिल रहा है.

वोक्कालिगा जेडीएस का पहले से ही परंपरागत समर्थक समुदाय रहा है. साउथ कर्नाटक में वोक्कालिगा बड़ी संख्‍या में खेतिहर हैं. वोक्‍कालिगा ऐसा समुदाय है, जिसने कर्नाटक को 5 मुख्‍यमंत्री दिए हैं. वोक्‍कालिगा की कर्नाटक के दक्षिण के 10 जिलों में मजबूत पकड़ है. इन जिलों में मंडया, हासन, मैसूर, कोलार चिकमंगलूर प्रमुखरूप से शामिल हैं.

कर्नाटक में सत्‍तारूढ़ कांग्रेस भी जेडीएस को वोक्कालिगा के समर्थन को लेकर सजग है. कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पिछड़े वर्ग की जाति, दलित और मुस्लिम ध्रुवीकरण में कोई भी उन्‍हें सत्‍ता से दूर कर सकती है. लेकिन मजबूत विक्‍कालिगा जरूर सत्‍तावापसी में खेल बिगाड़ सकते हैं. हाल ही में जेडीएस की रैलियों में वोक्‍कालिगा समुदाय की मौजूदगी से पार्टी में बड़ा उत्‍साह देखने को मिल रहा है.

कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि पूर्व के चुनावों में वोक्‍कालिगा कम्‍युनिटी का एक हिस्‍सा जेडीएस के बजाय दूसरी पार्टियों को वोट देता था, लेकिन इस बार ऐसा लग रहा है कि ये समुदाय जेडीएस के ज्‍यादा करीब आया और उनका समर्थन और भी बढ़ रहा है. वहीं, एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जेडीएस के समर्थन की घोषणा कर दी है. ओवैसी ने ये भी कहा है कि अगर जेडीएस को जरूरत पड़ी तो ओवैसी अपनी पार्टी के उम्‍मीदवार चुनाव में नहीं उतारेंगे.

जेडीएस को वोक्‍कालिगा और ओवैसी का समर्थन मिलने से कांग्रेस बीजेपी से भी ज्‍यादा नर्वस नजर आ रही. पुराने मैसूर क्षेत्र में प्रभावी इस जाति के वोट बीजेपी-लिंगायत गठजोड़ को कभी नहीं मिले हैं. वोक्‍कालिगा अधिकतर खेतिहर हैं और देवेगौड़ा के वोट बैंक का मजबूत आधार रहे हैं. वे इस चुनाव में एक बार फिर से पूर्व प्रधानमंत्री के पक्ष में एकजुट होते दिखाई दे रहे हैं. वोक्‍कालिगा का मानना है कि कांग्रेस ने उनकी उपेक्षा की है. वहीं, बीजेपी का मानना है कि साउथ कर्नाटक में जेडीएस के बेहतर प्रदर्शन करने के मायने है कि कांग्रेस कमजोर हुई. बता दें कि बीजेपी की ताकत उत्‍तरी कर्नाटक में है.

कांग्रेस प्रेसिडेंट राहुल गांधी कुछ महीने पहले वोक्‍कालिगा समुदाय के कृषिमंत्री कृष्‍णा बी गौड़ा को कनार्टक कांग्रेस का अध्‍यक्ष बनाना चाहते थे. लेकिन गौड़ा ने सिद्धारमैया के लिए प्रतीकात्‍मक अध्‍यक्ष बनकर प्रदेश में कांग्रेस का डमी नेतृत्‍व करने से इनकार कर दिया था. जाहिर तौर पर चीफ मिनिस्‍टर ने इस प्रस्‍ताव पर ज्‍यादा रुचि नहीं दिखाई थी. बहुत से लोगों का कहना है कि कुछ सालों तक कृष्‍णा बी गौड़ा जेडीएस में पहले रहे हैं.

आज सिद्धारमैया कन्‍नडिगा स्‍वाभिमान और दलित मुस्‍लिम और पिछड़ावर्ग के धुव्रीकरण का चेहरा बन चुके हैं. कांग्रेस बीजेपी पर बढ़त लिए दिखाई दे रही थी, लेकिन वोक्‍कालिगा समुदाय में अभी भी इतनी ताकत है कि वे कांग्रेस की सत्‍ता वापसी की ट्रेन को बेपटरी कर सकता हैं. चुनाव आने तक ये खेल जारी है और कांग्रेस को आसान बहुमत से सत्‍ता वापसी से वंचित रहना पड़ सकता है.