जम्मू: जम्मू-कश्मीर के उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने आतंकवादियों द्वारा मासूम लोगों की हत्या किए जाने पर अलगाववादियों की चुप्पी की अलोचना करते हुए कहा कि राज्य में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई निर्णायक चरण में पहुंच गई है. उन्होंने अलगाववादियों के साथ वार्ता का भी विरोध किया जो मासूम लोगों की हत्या के दौरान चुप थे और जब आतंकवादियों को खदेड़ा गया तो उन्होंने बंद का आह्वान किया. निर्मल सिंह ने एक समारोह के दौरान पत्रकारों से कहा कि हम आतंकवाद पर इस लड़ाई में निर्णायक चरण में पहुंच गए हैं. सीमा पार से यह प्रतिक्रिया अपेक्षित थी लेकिन हमने स्थिति पर नियंत्रण कर लिया है.

उन्होंने कहा कि जो आत्मसपर्मण करने को तैयार हैं उन्हें शांतिपूर्ण जिंदगी बिताने का मौका दिया जाता है लेकिन जो लड़ने को उतारू हैं वे उसके परिणाम भुगत रहे हैं. दक्षिण कश्मीर में एक ही दिन में (पिछले रविवार ) 13 आतंकवादियों को खदेड़ा गया और अन्य ने आत्मसपर्मण किया. यह कमजोर नीतियों के कारण नहीं हुआ.

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि सरकार बातचीत शुरू करे. उन्होंने पूछा कि आखिर किससे जो मासूमों की हत्या कर रहे हैं या जो युवकों को हवाला के जरिए पैसे भेजकर पथराव करने के लिए उकसा रहे हैं. निर्मल सिंह ने कहा जब मासूम मारा जाता है तो हुर्रियत खामोश रहता है लेकिन जब एक आतंकवादी को खदेड़ा गया तो उन्होंने बंद बुला लिया. उप मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह अलगाववादियों और पाकिस्तान के साथ वार्ता की मांग कर राजनीति कर रही है.

इससे पहले जम्मू-कश्मीर से लोकसभा सदस्य फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच में स्थित होने के कारण घाटी के लिए आजादी कोई विकल्प नहीं है. पुंछ जिले के मंडी इलाके में पार्टी की एक सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री फारूक ने कहा, आजादी कोई विकल्प नहीं है, एक तरफ चीन और पाकिस्तान जैसी परमाणु शक्तियां हैं और दूसरी तरफ हमारे पास भारत है.

उन्होंने कहा कि हमारे पास न परमाणु बम है, न सेना है और न लड़ाकू विमान हैं. स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में हम कैसे जिंदा रह पाएंगे? लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि हम भारत के गुलाम हैं. नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक ने कहा कि भारत को हर हाल में यहां के लोगों की गरिमा का आदर और सम्मान करना होगा, अन्यथा कश्मीर के हालात नहीं बदलेंगे.