गुजरात चुनाव की तारीखों का ऐलान आज होने जा रहा है. गुजरात का चुनाव भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों के लिए बेहद अहम है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस बार बड़ा प्लान बनाया है. शाह ने गुजरात चुनाव के लिए 150 सीटों का लक्ष्य रखा है. गुजरात की राजनीति में अब चर्चा चल रही है कि आखिर क्यों अमित शाह ने 150 सीटों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा?

दरअसल, अमित शाह गुजरात की राजनीति में नया एजेंडा तय कर देना चाहते हैं. 1985 में माधव सोलंकी के नेतृत्व में कांग्रेस ने रिकॉर्ड 149 सीटें जीती थीं. बीजेपी इससे आगे बढ़कर 150 सीटें जीतकर संदेश देना चाहती है कि वह हर लिहाज से कांग्रेस से आगे रहेगी. 2012 के चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने 116 सीटें जीती थीं. अब जबकि मोदी देश के पीएम हैं तो अमित शाह चाहते हैं कि बीजेपी उन्हें 150 सीटों का तोहफा दें.   

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2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए सभी 26 सीटों पर कब्जा जमाया था. बीजेपी उसी प्रदर्शन को दोहराते हुए 182 में से 150 सीटों पर जीत हासिल करना चाहती है. अमित शाह ने यूपी चुनाव में भी 300 से ज्यादा सीटें जितने का दावा किया था और ये दावा सही साबित भी हुआ था. अब गुजरात चुनाव में उनका ये दावा हल्के में नहीं लिया जा सकता.

करीब 15 साल से बीजेपी यहां की सत्ता पर काबिज है. इस बार कांग्रेस उसे कड़ी टक्कर देने के मूड में है. यही वजह है कि राहुल गांधी दोबारा गुजरात पहुंचे हैं. राहुल और बीजेपी नेताओं के बीच जुबानी जंग चरम पर है. राहुल के निशाने पर न सिर्फ बीजेपी बल्कि आरएसएस भी है. उनके एक बयान ने यहां खूब तूफान भी मचाया. 

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हालांकि बीजेपी के लिए 150 सीटों का लक्ष्य हासिल कर पाना आसान नहीं होगा. इस बार हवा बीजेपी के खिलाफ भी दिख रही है. पाटीदार समाज पहले ही बीजेपी से नाराज चल रहा है. युवा नेता हार्दिक पटेल लगातार चुनौती बने हुए हैं. निकाय चुनाव नतीजों में इनकी नाराजगी का असर दिखा भी था. अगर ये नाराजगी विधानसभा चुनाव में भी दिखी तो बीजेपी का खेल बिगड़ सकता है.