मंगलवार को हुए जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में आर्मी कैम्प पर हमले में 2 मेजर समेत 7 जवान शहीद हो गए। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस इलाके में हमले को लेकर पहले से ही अलर्ट किया गया था। करीब 10 दिन पहले आखिरी रिपोर्ट में भी अलर्ट की बात की गई थी, लेकिन उसके बाद भी आतंकी देश को नुकसान पहुँचाने में कामयाब हो गए। यही नही कश्मीर के मच्छल सेक्टर में मुठभेड़ में एक जवान शहीद हो गया था उससे पहले बीएसएफ के काफिले पर किए गए हमले में तीन जवान शहीद हो गए थे।

भारत बनाम पाकिस्तान दोनों देशो की अनबन पूरी दुनिया जानती है। जहां भारत अमन और शांत स्वभाव के लिए जाना जाता है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान एक ऐसा देश बनकर उभरा है जो आतंकवाद को बढ़ावा देता है। पाकिस्तान की जमीन पर आतंकवाद बेखौफ फल-फुल रहें हैं। इस बात के कई सबूत भारत ने पाकिस्तान समेत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दे चूका है। भारत के सिने पर पाकिस्तान में छिपे आतंकियों ने कई जख्म दिए है जिसमे 26/11 से लेकर पठानकोट सहित उरी आतंकी हमला शामिल है। लेकिन इन सब के बाद भी भारत ने पाकिस्तान से बेहतर रिश्तें बनाने की कोशिश की थी। लेकिन अंतिम हमला जो उरी में हुआ उसके बाद से भारत ने अपना रुख कड़ा किया और पाकिस्तान को सबक सिखानें का फैसला कर लिया।

उरी आतंकी हमले में 19 सेना के जवान शहीद हो गए थे। जिसके बाद सेना ने एक सर्जिकल स्ट्राइक किया और 55 आतंकियों को POK में घुसकर मौत के घात उतार दिया। इस एक साहसिक कदम के बाद सेना का मनोबल बढ़ा और हर भारतीय खुश हुआ। लेकिन अब मन में एक सवाल उठने लगा है की आखिर क्यों सेना के जवान शहीद हो रहें है। पाकिस्तान की जमीन पर रहने वाले आतंकी घात लगाकर हमला करतें हैं। हमारे जवान उनका डटकर मुकबला करते हैं और उन्हें मारते भी है लेकिन इसमें नुकसान हमारा ज्यादा होता है। यह भी पढ़ें: JK: नगरोटा हमले में 3 आतंकियों की मौत 7 जवान शहीद, सेना ने शुरू किया कॉम्बिंग ऑपरेशन

अब आलम ऐसा है की देश के अंदर हर 10 या 15 दिन बाद एक खबर आई जाती है की आतंकी हमले में सेना का जवान शहीद हुआ या सेना का अधिकारी शहीद हो गया। लेकिन अब सवाल यह है की कब तक हमारे जवान इसी तरह से शहीद होते रहेंगे। कश्मीर में आतंकी बड़ी आसानी से हमला करने में कामयाब कैसे हो जाते हैं। एक सवाल यह भी उठता है की जब खुफिया विभाग सेना को इस बात की जानकारी पहले ही दे देती है की आतंकी हमला होने वाला है तो क्यों नही सेना सतर्क रहती है। आखिर कमी कहां रह जाती है जो देश के वीर जवानो पर आतंकी हमला करने में कामयाब हो जाते हैं। भारत के खिलाफ कई आतंकी संघठन रोज देश को बर्बाद करने का प्लान बनातें हैं।

इन हमलो के अलावा बात करें तो पठानकोट का आतंकी हमला, उरी हमला, मुंबई में हुआ 26/11 का आतंकी हमला। कई हमले होते हैं कई की गिनती करना मुश्किल होता है। लेकिन इनता सब कुछ होने के बाद भी आखिर क्यों सेना के जवान आतंकियों के मंसूबों को समझ नही पा रहें हैं क्यों कुछ दिनों के गैप के बाद एक जवान के शहीद होने की खबर आती है। यह भी पढ़ें: पठानकोट हमला: NIA ने जारी की आतंकियों की तस्वीरें

ऐसा नही है की सेना के जवान आतंकियों मुंहतोड़ जवाब नही देते है। अगर 1988 से फरवरी 2016 तक सेना के इन 28 वर्षों में भारतीय सेना के जवानों ने अपने प्राण न्योछावर कर के आतंकियों से लोहा लिया। भारतीय सेना और आतंकी मुठभेड़ो के परिणाम पर हम नजर डाले तो सेना के 6188 जवान शहीद हुए और तकरीबन 14,724 बेकसूर लोग हैं। दूसरी तरफ सेना ने मुठभेड़ के दौरान 22,984 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया है। वैसे मौत के आंकड़ो पर नजर डाले तो एक बात साफ़ है की सेना ने आतंकियों को ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। लेकिन सेना के जवान जब शहीद होते हैं तो मन में यही सवाल उठता है क्या सेना सिर्फ शहीद होने के लिए बनी है। मेरे मन में भी यही सवाल है और आपके मन में भी यही सवाल उठेगा क्योंकि अपने जाने का दर्द सिर्फ अपनों को होता है। दिन रात चौकसी करने वाले जवानों के शहीद होने पर हर कोई रोता है।

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