नई दिल्ली. पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल (एस) के सुप्रीमो एच.डी. देवेगौड़ा कर्नाटक विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सत्तारूढ़ कांग्रेस के साथ गठबंधन करने लेकर असमंजस में हैं. पहले वे गठबंधन को लेकर स्पष्ट तौर पर इनकार कर रहे थे. लेकिन मंगलवार को उन्होंने कांग्रेस के साथ एक बार फिर गठबंधन के संकेत दिए हैं. कांग्रेस ने उनकी गठबंधन की इच्छा पर हालांकि कोई रुख नहीं दिखाया है. वहीं, देवेगौड़ा के बेटे एच.डी. कुमारस्वामी ने भी कुछ दिनों पहले स्पष्ट कर दिया था कि उनकी पार्टी कांग्रेस से हाथ नहीं मिलाएगी. फिर भी देवेगौड़ा को उम्मीद है कि कांग्रेस आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए उनकी पार्टी के साथ गठबंधन करेगी.

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पहले कांग्रेस के खिलाफ, फिर साथ आने का बयान
ज्यादा दिन पुरानी बात नहीं है जब देवेगौड़ा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था कि वे कांग्रेस से हाथ नहीं मिलाएंगे. उन्होंने इसी साल 22 जनवरी को मंगलोर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था, ‘मैंने कांग्रेस को समर्थन देकर अपनी उंगलियां जलाई हैं. इसलिए हम चुनाव में जनता के सामने अपनी-अपनी नीतियों और योजनाओं के साथ उतरेंगे. मैं यह नहीं कह सकता कि चुनाव में हमारी पार्टी को कितनी सीटें आएंगी, लेकिन मेरा लक्ष्य है कि राज्य के हर जिले से कम से कम एक विधायक हमारी पार्टी का हो.’ वहीं, बीते सोमवार को भी देवेगौड़ा ने राहुल गांधी के खिलाफ जमकर हमला किया था. साथ ही कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष छवि को लेकर सवाल भी उठाए थे. लेकिन अचानक ही बीते मंगलवार को उनका अंदाज-ए-बयां बदल गया. मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री से उनके घर मिलने आए कुछ प्रगतिशील विचारकों के साथ बातचीत में एच.डी. देवेगौड़ा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के संकेत देते हुए कहा, ‘कांग्रेस यदि कोई ऐसा प्रस्ताव लाती है, तो हम इस पर जरूर विचार करेंगे.’ दरअसल, प्रगतिशील विचारकों का यह प्रतिनिधिमंडल देवेगौड़ा से कांग्रेस के साथ गठबंधन करने की संभावना पर चर्चा करने के संदर्भ में ही मिलने पहुंचा था.

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कम सीटें आने का डर या मिलकर सरकार बनाने की संभावना
पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा का कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन को लेकर राजनीतिक विश्लेषक कई तरह के कयास लगा रहे हैं. यह बड़ी असमंजस की स्थिति है, क्योंकि एक तरफ तो देवेगौड़ा कांग्रेस से समन्वय की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुमारस्वामी के बयान भाजपा के साथ जाने के लगाए जा रहे हैं. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि कहीं जनता दल (एस) आने वाले चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच होने वाली लड़ाई से डर तो नहीं गई है? वहीं कुछ विश्लेषकों का मत है कि जनता दल (एस) कांग्रेस के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मिलकर सरकार बनाना चाहती है. वैसे, जनता दल (एस) ने अभी बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन कर रखा है. कांग्रेस ने उसके साथ गठबंधन करने के कोई संकेत नहीं दिए हैं. ऐसे में कर्नाटक की जनता को अभी इंतजार ही करना होगा कि क्या ये दोनों पार्टियां चुनाव पूर्व गठबंधन कर सियासी मैदान में उतरेंगी या फिर चुनाव के बाद दोनों सीटों का तालमेल करेगी.

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