नई दिल्ली. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय वित्त मंत्री रह चुके यशवंत सिन्हा मोदी सरकार की लगातार आलोचना कर रहे हैं. नोटबंदी से लेकर अर्थव्यवस्था तक के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मुखर यशवंत सिन्हा ने इंडियन एक्सप्रेस में ‘Dear friend Speak up’ टाइटल से एक ऑर्टिकल लिखा है. इसमें उन्होंने सांसदों से मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है. वहीं, 5 बगावती दलित सांसद की तारीफ करते हुए सरकार की कई नीतियों की आलोचना की है. उन्होंने पार्टी के मूल्यों को बचाने के लिए आडवाणी और जोशी से स्टैंड लेने की भी अपील की है.

यशवंत सिन्हा ने लिखा है, हम सबने साल 2014 में पार्टी की जीत के लिए जीतोड़ मेहनत की थी. हममें से कुछ यूपीए सरकार के खिलाफ संसद से लेकर सड़क तक लगातार संघर्ष कर रहे थे. हालांकि, उस समय भी कुछ लोग अपने राज्यों में मलाई खा रहे थे. साल 2014 के रिजल्ट से हम सब खुश थे और उम्मीद किए हुए थे कि यह अभूतपूर्व जीत हमारे देश के इतिहास में नया और शानदार अध्याय लिखेगा. सरकार ने अब लगभग चार साल पूरे कर लिए हैं और पांच बजट पेश कर चुकी है. सरकार उपलब्ध सभी अवसरों का इस्तेमाल कर चुकी है, लेकिन अंत में हम देखते हैं कि हम अपने रास्ते से भटक गए हैं और वोटर्स का विश्वास खो चुके हैं.

यशवंत सिन्हा ने इन मुद्दों पर जोर दिया है…

1. सरकार भले बड़े-बड़े दावे कर रही है कि हमारी अर्थव्यवस्था दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, लेकिन यह स्पष्ट है कि हमारी अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में नहीं है. तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था अपने बैंकों में नॉन-परफॉर्मिंग परिसंपत्तियों को जमा नहीं करती हैं. किसान संकट में नहीं होते हैं. युवा बेरोजगार नहीं होते हैं. छोटे उद्योग चौपट नहीं होते हैं. सेविंग और इनवेस्टमेंट इस तरह नहीं गिरते हैं जैसा कि पिछले चार साल में देखा गया है. स्कैम करने वाले भाग भी जाते हैं और सरकार देखती रह जाती है.

2. महिलाएं पहले से ज्यादा असुरक्षित हैं. बलात्कार की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं और बलात्कारियों को सजा दिलाने की जगह हम उनके समर्थक बन गए हैं. कई केस में हमारे लोग ही इस तरह के अपराध में शामिल हैं.

3. अल्पसंख्यक अलग-थलग पड़े हुए हैं. हमारे समाज का कमजोर तबका अनुसूचित जाति-जनजाति पर जिस तरह से अत्याचार हो रहा है वैसा कभी देखने को नहीं मिला. संविधान से उन्हें मिले वादे भी संकट में हैं.

4. विदेश नीति की बात करें तो प्रधानमंत्री के विदेश दौरों और अपने विदेशी समकक्षों को गले लगाने का कोई फायदा मिलता नहीं दिखा. यहां तक कि हम अपने पड़ोसी देशों से भी अच्छे रिश्ते नहीं रख पाए हैं और चीन हमारे हितों को कुचल रहा है.

5. पाकिस्तान के खिलाफ हमारे जवानों द्वारा बहादुरी से किया गया सर्जिकल स्ट्राइक बेकार चला गया और पाकिस्तान लगातार आतंकवादी हमले कर रहा है. हम असहाय होकर ये सब देख रहे हैं. जम्मू-कश्मीर लगातार जल रहा है. आम व्यक्ति इससे पहले वहां इतना परेशान नहीं था.

6. बीजेपी में आंतरिक लोकतंत्र पूरी तरह से नष्ट हो गया है. हमारे दोस्त बताते हैं कि पार्टी की संसदीय मीटिंग में भी सांसद पहले की तरह आवाज नहीं उठाते हैं. पार्टी की दूसरी बैठकों में भी कम्यूनिकेशन सिर्फ एक तरफ से ही होता है. वे बोलते हैं और आप सुनते हैं. प्रधानमंत्री के पास आपके लिए समय नहीं है. पार्टी हेडक्वार्टर कॉर्पोरेट ऑफिस बन गया है.

7. पिछले चार साल में हमारे लोकतंत्र पर भी खतरा सामने आया है. लोकतंत्र के संस्थानों को हल्का किया गया है उसकी निंदा की गई है. संसद का मजाक बनाया जा रहा है. बजट सत्र के पूरी तरह से खराब होने के बाद भी प्रधानमंत्री ने विपक्ष के नेताओं के साथ कोई बैठक नहीं की.

8. सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस हमारे लोकतांत्रिक इतिहास के इतिहास में अभूतपूर्व है. इससे स्पष्ट तौर पर मालूम होता है कि देश के न्यायिक संस्थानों को सड़ाने की अनुमति दे दी गई है. जजों ने भी ये मुद्दा उठाया था कि हमारे देश का लोकतंत्र खतरे में है.

9. पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने लिखा, आज लगता है कि संचार के साधनों को नियंत्रित करके (खासतौर पर सोशल मीडिया को) चुनाव जीतना हमारी पार्टी का मुख्य उद्देश्य है. पार्टी के लोगों को उन्होंने चेतावनी दी कि मुझे नहीं पता कि आप में कितनों को अगले लोकसभा चुनाव में टिकट मिलेगा. लेकिन पहले के अनुभवों को देखें तो आप में से आधों का टिकट कटेगा. लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 31 फीसदी वोट मिले थे. 69 फीसदी ने बीजेपी के खिलाफ वोट दिया था. ऐसे में विपक्ष एकजुट हो जाता है तो आप कहीं नहीं रह जाएंगे.

10. वर्तमान स्थिति यह मांग करती है कि आप राष्ट्रीय हित के चीजों को उठाएं. मुझे यह बताने में खुशी है कि पांच दलित सांसदों ने सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है. मैं आपसे भी कहता हूं कि आप अपने मुद्दों को बॉस के सामने उठाइए. आप ऐसा नहीं करते हैं तो आने वाली पीढ़ियां आपको माफ नहीं करेगी.

11. यशवंत सिन्हा ने अपने लेख में आडवाणी और जोशी से भी अपील की है. उन्होंने लिखा है, मैं आडवाणी और जोशी से अपील करता हूं कि राष्ट्रीय हित के मुद्दे पर स्टैंड लें और यह सुनिश्चित करें कि जिन मूल्यों को बनाए रखने के लिए अद्वितीय बलिदान दिए गए हैं वह सुरक्षित रहें.