नई दिल्ली. शनिवार को वर्ल्ड टीबी डे यानी विश्व क्षय रोग दिवस है. इस मौके पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट भारत के बारे में कहती है कि दुनिया में टीबी के कारण होने वाली मौतों में सबसे ज्यादा मौत भारत में होती है. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट का यह निष्कर्ष आपको शर्मनाक लग सकता है, लेकिन हकीकत यही है. चौंकाने वाली बात यह है कि डब्ल्यूएचओ ने वर्ल्ड टीबी डे के मौके पर वर्ष 2016 में यह रिपोर्ट जारी की थी. जनवरी 2018 में इस रिपोर्ट को रिन्यू कर दिया गया. बावजूद इसके भारत के संदर्भ में यह आंकड़ा नहीं बदला. आज वर्ल्ड टीबी डे के मौके पर आइए जानते हैं इस रिपोर्ट की कुछ खास बातें.

1. दुनिया में मौत के 10 कारणों में टीबी से होने वाली मौत सबसे ज्यादा है.
2. वर्ष 2016 में पूरे विश्व में 10.4 मिलियन लोग टीबी के शिकार हुए, जिनमें से 1.7 मिलियन की मौत हो गई. इनमें से 95 फीसदी मौतें निम्न और मध्यम आयवर्ग वाले देशों में हुई.
3. दुनिया में टीबी के मरीजों की संख्या का 64 प्रतिशत सिर्फ सात देशों में है, जिनमें भारत सबसे ऊपर है. भारत के बाद इंडोनेशिया, चीन, फिलीपींस, पाकिस्तान, नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका है.
4. वर्ष 2016 में दुनियाभर में करीब 10 लाख बच्चों को टीबी हुई, इनमें से ढाई लाख बच्चों की मौत हो गई. इनमें वे बच्चे भी शामिल थे जिनमें टीबी के साथ-साथ एचआईवी के भी लक्षण पाए गए थे.
5. एचआईवी से पीड़ित होने वाले रोगियों की मौत का सबसे बड़ा कारण टीबी ही है. 2016 में ही टीबी से ग्रसित जिन मरीजों की मौत हुई उनमें से 40 प्रतिशत मरीज एचआईवी के शिकार हो गए थे.

6. वैश्विक स्तर पर टीबी के मरीजों की संख्या में गिरावट का स्तर सालाना सिर्फ 2 प्रतिशत है. डब्ल्यूएचओ के अनुसार यदि वर्ष 2020 तक इसे 4 से 5 प्रतिशत तक लाकर ही दुनिया से टीबी खत्म करने की दिशा को सही माना जा सकता है.

7. डब्ल्यूएचओ के अनुसार वर्ष 2000 से लेकर वर्ष 2016 तक 53 मिलियन यानी 5 करोड़ से ज्यादा लोगों को सही समय पर इलाज की सुविधा मुहैया कराए जाने से टीबी से बचाया जा सका है.

8. डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि दुनिया के सभी देश अगर सही तरीके से टीबी से संघर्ष करते रहे तो वर्ष 2030 तक इस बीमारी के ऊपर काबू पाया जा सकता है. स्वास्थ्य के क्षेत्र में संस्था ने यही लक्ष्य निर्धारित कर रखा है.

9. टीबी से लड़ाई के लिए डब्ल्यूएचओ ने सभी देशों के लिए कुछ प्रस्ताव तय किए हैं. इनमें सभी देशों की सरकारों को टीबी के उन्मूलन के लिए कारगर कदम उठाने, बीमारी की रोकथाम के लिए समुचित निगरानी प्रणाली विकसित करने और रोग के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने की सलाह दी गई है.

10. डब्ल्यूएचओ ने सभी देशों को यह भी सलाह दी है कि वे टीबी से ग्रसित मरीजों की देखभाल को लेकर वैश्विक स्तर पर समन्वय स्थापित करें, ताकि टीबी के मरीजों के मानवाधिकारों की रक्षा हो सके.
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डब्ल्यूएचओ ने अपने लिए भी तय कर रखे हैं काम
टीबी से लड़ने के लिए डब्ल्यूएचओ ने खुद के लिए भी कई काम निर्धारित कर रखे हैं. इसके तहत संस्था वैश्विक स्तर पर टीबी से संघर्ष की कार्ययोजना पर काम कर रही है. संस्था समूचे विश्व के लिए विषय-वस्तु आधारित नीतियां बना रही है. साथ ही टीबी की रोकथाम के लिए समुचित निगरानी तंत्र बनाने पर भी काम कर रही है. टीबी के मरीजों को सही समय पर सही इलाज मिल सके, इसके लिए संस्था सभी सदस्य देशों को तकनीकी सहयोग मुहैया कराती है. साथ ही जिन देशों में बीमारी की स्थिति गंभीर है, वहां लगातार मॉनिटरिंग भी करती है. टीबी से संबंधित रिसर्च, दवा उत्पादन और अन्य सहयोग भी यह संस्था अपने सदस्य देशों को उपलब्ध कराती है.