नई दिल्ली: हिन्दू पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया साल का सबसे शुभ दिन होता है. इस बार यह त्योहार 18 अप्रैल को मनाया जाएगा. इस त्योहार का मनाने के पीछे कई वजहें हैं. मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म हुआ था. वहीं यह भी कहा जाता है कि आज ही के दिन वेद व्यास और भगवान गणेश ने महाभारत का लेखन शुरू किया था. अक्षय तृतीया की तिथि वैशाख महीने में आती है. अक्षय तृतीया के दिन किसी भी शुभ मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती. अक्षय तृतीया के किसी भी वक्त शुभ कार्य किए जा सकते हैं. इसे अक्का तीज भी कहते हैं.

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गुजरात में कैसे मनाते हैं…
गुजरात में अक्षय तृतीया के दिन सोने और चांदी की खरीदारी शुभ मानी जाती है. गुजराती यह मानते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन स्वर्ण आभूषणों की खरीदारी जीवन में आर्थिक सम्पन्नता लेकर आती है. गुजरात में इस दिन ज्यादातर लोग सोने के गहने खरीदते हैं. जैन समाज के लिए यह त्योहार महत्वपूर्ण होता है.

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जैन इसे आदिनाथ की जयंती के रूप में मनाते हैं. आदिनाथ जैनियों के 24वें जैन तीर्थंकरों हैं. गुजरात के सर्राफा बाजार में इस दिन काफी चहल पहल रहती है. आजकल लोग सोने के गहनों की बजाय ऑनलाइन सोने की बिस्किट में निवेश करते हैं.

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इस दिन गुजरात में जैन धर्म के अनुयायी व्रत भी रखते हैं और गरीबों को भोजन व वस्त्र दान करते हैं.