नई दिल्ली: चैत्र कृष्णपक्ष के चौथे दिन को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है. चतुर्थी जब मंगलवार को पड़ती है तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है. संकष्टी चतुर्थी संकटों को खत्म करने वाली चतुर्थी है. संकट चतुर्थी वाले दिन व्रत रखा जाता है और भगवान गणेश की पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि संकष्टी चतुर्थी यदि मंगलवार के दिन आ रही हो तो विशेष रूप से लाभदायी होती है.

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी के दिन ऐसे करें पूजा
गणेश चतुर्थी के दिन सूर्योदय से पहले जगकर स्नान आदि से निवृत हो जाना चाहिए और साफ सुथरा या नया कपड़ा पहनना चाहिए. गणेश की पूजा के समय धूप जलाएं और सच्‍चे मन से उनकी पूजा करें. पूजा के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा को ईशानकोण में चौकी पर स्थापित करें. सबसे पहले पूजा का संकल्प लें और फिर उन्हें जल, अक्षत, दूर्वा घास, लड्डू, पान, धूप आदि अर्पित करें. इसके बाद एक थाली या केले का पत्ता लें, इस पर आपको एक रोली से त्रिकोण बनाना है. त्रिकोण के अग्र भाग पर एक घी का दीपक रखें. इसी के साथ बीच में मसूर की दाल व सात लाल साबुत मिर्च को रखें.

पूजन उपरांत चंद्रमा को शहद, चंदन, रोली मिश्रित दूध से अर्घ्य दें. पूजन के बाद लड्डू प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें. भौतिक सुखों की प्राप्ति हेतु गणेश जी पर बेल फल चढ़ाएं. पारिवारिक विपदा से मुक्ति हेतु गणेश जी पर चढ़े गोलोचन से घर के मेन गेट पर तिलक करें. रुके मांगलिक कार्य संपन्न करने हेतु शक्कर मिली दही में छाया देखकर गणपति पर चढ़ाएं.

अंगारकी चतुर्थी का महत्व
भगवान गणेश का एक भक्त था अंगारकी. अंगारकी ऋषि भारद्वाज और मां पृथ्वी का बेटा था. उसने भगवान गणेश की तपस्या शुरू कर दी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान गणेश अंगारकी के समक्ष आए और उनसे उनकी इच्छा के बारे में पूछा. अंगारकी ने कहा कि हे प्रभु मैं आपके नाम के साथ जुड़ना चाहता हूं. मेरा नाम भी आपके नाम के साथ जुड़ जाए. इस पर गणपति ने उन्हें वरदान दिया कि जब भी मंगलवार को चतुर्थी पड़ेगी, उस चतुर्थी को अंगारकी चतुर्थी कहा जाएगा. अंगारकी को भगवान मंगल भी कहा जाता है.

इस साल 13 चतुर्थी आएगी. पहली चतुर्थी 3 अप्रैल को मनाई जाएगी, जिसे अंगारकी चतुर्थी के रूप में मनाया जाएगा. इससे पहले 5 जनवरी, 3 फरवरी और 5 मार्च को चतुर्थी मनाई गई थी.

शुभ मुहूर्त और तिथि
अंगारकी चतुर्थी की तिथि 3 अप्रैल को शाम 4:43 बजे से शुरू हो रही है और 4 अप्रैल को शाम 5:32 बजे तक रहेगी. संकष्टी के दिन चंद्रमा रात 9:27 बजे निकलेगा.

इस मंत्र का करें जाप

गजाननं भूतगणादि सेवितं
कपित्थ जम्बूफलसार भक्षितम्
उमासुतं शोक विनाशकारणं
नमामि विघ्नेश्वर पादपङ्कजम् ॥

इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है. इस दिन व्रत करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सभी बाधाएं टूट जाती हैं.