नई द‍िल्‍ली: एक अप्रैल को पूरी दुनिया में ‘अप्रैल फूल डे’ मनाया जाता है. आज दुन‍ियाभर के लोग एक दूसरे से मजाक करते हैं और मूर्ख बनाते हैं. कोई अपने मजाक से डरा देता है तो कोई हंसा देता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है एक अप्रैल को फूल डे मनाने की परंपरा की शुरुआत क्यों और कैसे हुई? आंकड़ों की मानें तो इसकी शुरुआत 1 अप्रैल 1392 के दिन पहली बार हुई थी. इस बात का सबूत चॉसर के कैंटबरी टेल्स में दिया गया है. चलिए हम आपको बताते हैं ‘अप्रैल फूल’ से जुड़ा इतिहास और कुछ मजेदार क‍िस्से.

इतिहास

सबसे पहला अप्रैल फूल साल 1381 को बनाया गया था. कहा जाता है कि इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय और बोहेमिया की रानी एनी ने अपनी सगाई की घोषणा 32 मार्च 1381 के दिन के लिए कहा था. वहां के लोगो ने इस बात को बिना सोचे समझे गंभीरता से ले लिया और इंतज़ार करने लगे. जब सभी ने अपने घर जाने के बाद बात पर गौर किया तब उन्हें पता चला की उन्हें इस तरह से एक अप्रैल के दिन मूर्ख बनाया गया था.

भारतीय कैलेंडर की कहानी

भारतीय कैलेंडर के अनुसार नया साल चैत्र मास में शुरू होता है, जो अप्रैल महीने में होता है. पूरे व‍िश्‍व में भी इसी कैलेंडर काेे माना जाता था. 1582 में पोप ग्रेगोरी ने नया कैलेंडर लागू करने के लिए कहा जिसके अनुसार नया साल अप्रैल के बजाय जनवरी में शुरू होने लगा और ज्‍यादातर लोगों ने नए कैलेंडर को मान लिया. हालांकि कुछ ऐसे लोग भी थे, जिन्‍होंने नए कैलेंडर को मानने से इनकार कर दिया और अप्रैल में ही नया साल मनाने लगे. इस कारण उन्‍हें मूर्ख कहा जाने लगा और यहीं से 1 अप्रैल को अप्रैल फूल डे मनाया जाने लगा.

कई हैं क‍िस्से

– अमेरिका में अधिकारियों ने हवाई और एलुइतन द्वीप पर सुनामी आने की चेतावनी 31 मार्च 1946 को दी थी. लेक‍िन मगर आपको बता दें कि लोगोंं ने इस बात को मजाक में लिया और ऐसे 1 अप्रैल 1946 को आए सुनामी में लगभग 165 लोगोंं ने अपनी जान से हाथ धो दिया.

– 1 अप्रैल 1947 में किंग जॉर्ज की मौत हो गई थी. इस बात को मीडिया ने कवर कर दिखाया, मगर लोगों ने इस बात पर इस कारण भरोसा नहीं किया क्योंकि वह अप्रैल फूल वालों दिन था.

– 1 अप्रैल के दिन किंगडम हार्ट्स और फाइनल फैंटेसी जैसे गेम बनाने वाली कंपनीयों ने विलय किया था. इस दिन की तारीख 1 अप्रैल होने के कारण विलय को सभी ने एक मजाक समझा था.

– गूगल जैसी जानीमानी कंपनी ने 2004 में 1 अप्रैल के दिन ही जीमेल लांच किया था, जिस पर किसी ने विश्वास नहीं किया था. आज की तारीख में हमारा सारा काम जीमेल के जरिए ही होता है.