नई दिल्ली: टीवी और अखबारों में फेयरनेस क्रीम का ऐड देखकर आप हर वो क्रीम आजमाते हैं, जो त्वचा की सांवली रंगत को गोरा बनाने का दावा करते हैं. लेकिन एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि फेयरनेस क्रीम के तौर पर इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर क्रीम फंगल इंफेक्शन का सबब बन सकती हैं या आपको एंटी फंगल ट्रीटमेंट का रेसिस्ट बना सकती हैं. यानी फेयरनेस क्रीम से हुए फंगल इंफेक्शन का इलाज करना आसान नहीं होता. क्रीम में मौजूद स्टेरॉयड्स के कारण चेहरे पर पिंपल्स, दानें, काले धब्बे आदि होते हैं.

भारतीय संस्थान का अध्ययन

यह अध्ययन की रिपोर्ट दुनिया के दूसरे सबसे बड़े त्वचा विशेषज्ञ के एसोसिएशन और भारतीय त्वचा विशेषज्ञों के सबसे बड़े आधिकारिक निकाय इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्माटोलॉजिस्ट वेनेरियोलॉजिस्ट्स एंड लेप्रोलॉजिस्ट्स (IADVL) ने जारी की हैं.

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गांवों के साथ शहरों में भी बढ़ा इस्तेमाल

IADVL ने यह रिपोर्ट ‘वर्ल्ड स्किन हेल्थ डे’ के मौके पर 6 अप्रैल को जारी किया और त्वचा की सफाई के महत्व को बताया. वहीं IADVL ने फेयरनेस क्रीमों के दुरुपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में भी बताया. IADVL द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में ज्यादातर लोग ऐसी क्रीमें इस्तेमाल करते हैं जो फेयरनेस क्रीम्स हैं और जिनमें अत्यधिक मात्रा में टॉपिकल स्टेरॉयड मिला होता है. यह ना केवल कम पढ़े लिखे लोगों और ग्रामीण इलाकों में प्रचलित है, बल्कि इसका इस्तेमाल शहरी इलाकों में भी धड़ल्ले से हो रहा है.

बाजार में मिलते हैं आसानी से

सर गंगा राम अस्पताल के डर्माटोलॉजिस्ट डॉ रोहित बत्रा ने बताया कि बाजार में ऐसे फेयरनेस क्रीम और ऑन्टमेंट बिक रहे हैं, जिसमें बड़ी मात्रा में स्टेरॉयड्स मौजूद होता है. यह बाजार में बहुत आसानी से मिल जाते हैं और इसके लिए किसी डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन की जरूरत नहीं होती. त्वचा से संबंधित किसी भी परेशानी के लिए त्वचा विशेषज्ञ से मिलना चाहिए. लेकिन ज्यादातर लोग खुद से ही इलाज करने लगते हैं.

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आजकल दवाएं बनाने वाली कंपनियां बड़ी ही आसानी से पर्मिशन लेकर नये एंटीफंगल फॉर्मूला वाले पाउडर और क्रीम लेकर आ रहे हैं, जैसे कि फ्लूकोनाजोल पाउडर, इट्राकोनाजोल पाउडर और एमफोटेरिसिन बी जेल आदि. बाजार में आसानी से मिलने वाला TCS और इसमें जिन तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है उसे नियंत्रित किया जाना चाहिए.

IADVL के अध्ययक्ष डॉ. रमेश भट्ट ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग, पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों और एंटी फंगल क्रीम्स ने त्वचा की बीमारियों को तेजी से बढ़ावा दिया है. त्वचा हमारे शरीर का सबसे बड़ा ऑर्गन है, इसलिए इसका ध्यान ज्यादा रखना चाहिए. जरूरत से ज्यादा टोपिकल स्टेरॉयड युक्त क्रीमों का इस्तेमाल त्वचा की कई समस्याओं को पैदा कर सकती हैं.