नई दिल्ली: ईसाई धर्म के अनुयायियों की संख्या विश्व में सर्वाधिक है. इस धर्म के लोग ईसा मसीह को अपना भगवान मानते हैं. ईसाई धर्म में हर साल गुड फ्राइडे को महत्वपूर्ण दिन माना जाता है. इस बार गुड फ्राइडे 30 मार्च शुक्रवार को है. इस दिन ईसा मसीह को रोमन सैनिकों ने सूली पर लटका दिया था. इसके बाद उन्होंने प्राण त्याग दिया था. दरअसल जीसस को इस बात का एहसास पहले ही हो गया था. इसलिए गुड फ्राइडे के 40 दिन पहले ही जीसस ने व्रत शुरू कर दिया था. जीसस ने बुधवार को अपना व्रत शुरू किया था, जिसे एश बुधवार यानी कि राख बुधवार के नाम से जाना जाता है. गुड फ्राइडे के दिन लोग व्रत रखते हैं और जीसस
की प्रार्थना करते हैं.

इस दिन को अलग-अलग देशों में भिन्न नामों से जाना जाता है. कुछ देशों में इसे ग्रेट फ्राइडे कहा जाता है, तो कुछ देशों में ईस्टर फ्राइडे, होली फ्राइडे या ब्लैक फ्राइडे के नाम से जाना जाता है.

जीसस ने त्याग दिया प्राण, फिर इस फ्राइडे को गुड क्यों कहा गया…
गुड फ्राइडे को ईसा मसीह ने अपने प्राण त्याग दिए थे. यह दिन ईसाई समाज के लिए बेहद दुख वाला है. लेकिन फिर भी इसे ‘Good Friday’ कहा जाता है. दरअसल, इसके पीछे की मान्यता यह है कि भगवान जीसस ने अपने प्राण लोगों की भलाई के लिए दे दी. इस दिन बुराईयों और पाप का नाश हो गया. इस दिन को पवित्र माना जाता है. इसलिए इसे गुड फ्राइडे कहा जाने लगा. ईसाई समाज गुड फ्राइडे के दिन कोई सेलिब्रेशन नहीं करती. कोई डेकोरेशन नहीं होता, चर्च में भी भीड़ नहीं होती. दुकाने बंद रहती हैं. डांसिंग या होर्स राइडिंग की भी इस दिन मनाही होती है.

जानें क्यों पहनते हैं क्रॉस:
आपने अक्सर ईसाई धर्म के लोगों के गले में क्रॉस देखा होगा. पोप के हाथ और गले दोनों में क्रॉस की आकृति देखी होगी. ईसाई धर्म में क्रास को बड़ा पवित्र माना जाता है. लोग इसकी पूजा करते हैं और इसके प्रतीक चिन्ह को गले में पहनते हैं. ज्ञान और प्रेम का संदेश फैलाने वाले ईसाई मसीह को लकड़ी के क्रॉस पर लटका दिया गया था. इस पर ईसा मसीह की मौत हो गई थी. इसलिए यह चिन्ह ईसाई धर्म में बड़ा पवित्र माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि क्रॉस चारों दिशाओं से सकारात्मक ऊर्जा खींचती है और जीवन से नकारात्मकता को खत्म करती है. इसे धारण करने वाले लोगों पर आत्माओं का साया नहीं पड़ता.