नई दिल्ली: ताजमहल पर मालिकाना हक किसका है यह अब भी विवाद और चर्चा का विषय बना हुआ है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में वक्फ बोर्ड ने कहा है कि उन्हें ताजमहल का मालिकाना हक नहीं बल्कि रखरखाव का अधिकार चाहिए.

न्यायालय ने इसके बाद इस मामले की सुनवाई 17 अप्रैल के लिये स्थगित कर दी. शीर्ष अदालत की एक अन्य पीठ ताजमहल को प्रदूषित गैसों और वृक्षों की कटाई से होने वाले दुष्प्रभावों से बचाने के लिये दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है. शीर्ष अदालत यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ताजमहल और इसके आसपास के क्षेत्र के विकास की निगरानी कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था शाहजहां के साइन लेकर आओ, अब बोर्ड ने कहा-ताजमहल का असली मालिक खुदा

ताजमहल, उसकी खूबसूरती और उससे जुड़ी खूबसूरत यादों के बारे में सभी बातें करते हैं. यह भी जानते हैं कि शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल के लिए यह प्यार का नायाब नमूना तैयार कराया, जिसे आज दुनिया के सबसे बड़े अजूबों में एक माना गया है. ताजमहल के बारे में बताया जाता है कि इसे बनाने के बाद कारीगरों के हाथ काट दिए गए थे, ताकि मजदूर कोई दूसरा ताजमहल ना बना सकें. इस धरोहर के बारे में जितना सुनों उतना कम ही लगता है. पर इसमें से कुछ हकीकत और कुछ फसाना भी हैं. हम यहां आपको ताजमहल से जुड़ी ऐसी 5 बातें बता रहे हैं, जो संभवत: आप नहीं जानते होंगे.

1. आगरा में नहीं बनना था ताजमहल

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ताजमहल का निर्माण आगरा में नहीं होने वाला था. मुमताज महल जिसके लिए ताजमहल बनवाया गया था, उनकी मौत दरअसल आगरा में हुई ही नहीं थी. उनकी मौत बुरहानपुर में हुआ था, आज के समय में मध्य प्रदेश में है. शाहजहां ने ताज महल के लिए बुरहानपुर में ताप्ती नदी के ठीक किनारे एक जगह पसंद की थी. लेकिन बुरहानपुर में जरूरत के अनुसार सफेद मार्बल नहीं पहुंच सके. इसलिए बाद में ताजमहल आगरा में बनाने का फैसला किया गया. बुरहानपुर में ताप्ती नदी के किनारे आज भी वह जगह विरान पड़ा है.

2. क्या सच है कि काला ताजमहल भी होता

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ताजमहल के बारे में कहा जाता है कि शाहजहां यमुना के किनारे काले संगमरमर में ताजमहल की प्रतिकृति बनाना चाहता था. शाहजहां को यह विचार जीन-बैप्टिस्ट टैवर्नियर नाम के एक यूरोपीय यात्री ने दिया था जो 1665 में आगरा में था. दावा यह भी किया जाता है कि औरंगजेब के कारण शाहजहां की योजना पूरी नहीं हो सकी. क्योंकि औरंगजेब ने अपने पिता शाहजहां को कैद कर लिया था. यमुना नदी से लगे महताब बाग में कुछ काले मार्बल देखे भी गए थे. लेकिन बाद में जांच परख के बाद इतिहासकारों और आर्केलॉजिस्ट सोइटी ने इस बात का खुलासा किया कि दरअसल महताब बाग में मिले काले मार्बल गंदगी के कारण काले पड़ गए हैं. वह मूल रूप से सफेद ही थे. इसलिए यह बात अफवाह से कम नहीं कि शाहजहां काले ताजमहल भी बनवाना चाहता था.

3. क्या सचमुच कारीगरों के हाथ काटे गए थे…

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ताजमहल के बारे में यह कहा जाता है कि उसने ताजमहल बनाने वाले सभी कारीगरों के हाथ काट दिए थे और कुछ को मार भी दिया था. लेकिन इतिहास में कहीं भी इस बात का साक्ष्य नहीं पाया गया.

4. ताजमहल को उजाड़ना चाहते थे अंग्रेज?

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ताजमहल से जुड़ी कहानियों में एक नाम और आता है. वह है भारत के गर्वनर जनरल लॉर्ड विलियम बेनटिंक का. इसके बारे में कहा जाता है कि लॉर्ड ताजमहल को गिराना चाहता था और उसके मार्बल की नीलामी कर देना चाहता था. इस बात के भी कहीं सबूत नहीं पाए गए. हालांकि उसके बायोग्राफर जॉन रोसेली ने अपनी किताब में एक जगह जरूर लिखा है कि आगरा फोर्ट को बनाने के बाद बचे हुए मार्बल्स को लॉर्ड ने नीलाम कर दिया था.

5. ताजमहल में लगा है एक लैंप

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ताजमहल में एक लैंप लगा हुआ है. कहा जाता है कि इसे बनाने में दो वर्ष का वक्त लगा था. इसे खास ताजमहल की नक्काशी को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया था. इसे मिश्र के कुछ कलाकार और टोड्रोस बदीर नाम के आर्टिस्ट ने मिलकर बनाया था.