नई दिल्ली: वरूथिनी एकादशी को बरूथनी एकादशी के नाम से भी जाना है. यह वैशाख (अप्रैल-मई) के महीने आती है. इस दिन लोग भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करते हैं. इसे कुछ लोग वैशाख कृष्ण एकादशी भी कहते हैं. ऐसी मान्यता है कि बरूथनी एकादशी के दिन व्रत रखने वाले लोगों के पापों का नाश हो जाता है. उन्हें जीवन में असीम सुख की प्राप्ति होती है और उनका भाग्य अच्छा हो जाता है.

कन्यादान के बराबर महत्व
वरूथिनी एकादशी का महत्व कन्यादान के बराबर है. कन्यादान को शास्त्रों में सबसे बड़ा दान महादान कहा जाता है. बरूथिनी एकादशी व्रत करने वाले जातकों को सौ कन्यादान के समान फल मिलता है.

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आध्यात्मिक महत्व
भविष्य पुराण के अनुसार भगवान कृष्ण ने राजा युधिष्ठिर को बरूथिनी एकादशी का महत्व बताया था. श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था कि इस व्रत को करने वाला व्यक्ति जानवर जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है. अगर जातक किसी भय या डर से ग्रसित है तो उसे बरूथिनी एकादशी व्रत रखना चाहिए और विष्णु की पूजा करनी चाहिए. इससे उसका भय हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा. बरूथिनी एकादशी पर गरीबों को दान करने से भाग्य चमकता है.

इन चीजों का दान करने से भाग्य बदलता है
भविष्य पुराण में बताया गया है कि बरूथिनी एकादशी पर दान करने से भाग्य चमकता है. इस दिन घोड़े, हाथी, भूमि दान, तिल के बीज आदि का दान करना चाहिए. इससे जातक का भाग्य चमक उठता है. यह व्रत करने से सिर्फ जातक को ही नहीं, बल्कि उसके पूर्वजों और परिवार के सदस्यों को भी फायदा होता है.

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बरूथिनी एकादशी से पहले ना करें इन चीजों का सेवन
1. धातु की प्लेट पर खाना नहीं कहना चाहिए.
2. किसी भी तरह के खाने में उड़द की दाल नहीं खानी चाहिए.
3. लाल मसूर की दाल नहीं खानी चाहिए.
4. मटर नहीं खानी चाहिए.
5. कोंदो अनाज नहीं खाना चाहिए.
6. शहद नहीं खाना चाहिए.
7. किसी अन्य व्यक्ति के घर में नहीं खाना चाहिए.
8. एक बार से अधिक खाने से बचे.
9. चना नहीं खाना चाहिए.
10 किसी भी तरह की सेक्स क्रियाएं ना करें.