नई दिल्‍ली: विषु केरल का प्राचीन त्योहार है. यह केरलावासियों के लिए नववर्ष का दिन है. यह मलयालम महीने मेष की पहली तिथि को मनाया जाता है. विषु सौभाग्य व अच्छी किस्मत के आगमन का प्रतीक माना जाता है और इस दिन केरल में सार्वजनिक अवकाश होता है.

ऐसी भी मान्‍यता है कि केरल में इसी दिन से धान की बुआई शुरू हो जाती है. केरल के साथ ही मलयालम में भी इसे नये साल की शुरुआत ही मानते हैं. इस दिन लोग नया पंचांग पढ़ते हैं और पूरे साल का अपना भविष्‍यफल देखते हैं. इस दिन केरल और मलयालम के हर घर में भगवान श्रीकृष्‍ण की पूजा की जाती है और अच्‍छे फसल की कामना की जाती है.

विषु के दिन का मुख्‍य आकर्षण ‘विषुक्कणी’ है. ‘विषुक्कणी’ झांकी-दर्शन को कहते हैं. त्‍योहार के दिन आंख खोलने के बाद सबसे पहले विषुक्‍कणी का दर्शन किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि विषुक्‍कणी का असर पूरे साल रहता है और इसके दर्शन से जीवन की र्क परेशानियां खत्‍म हो जाती हैं. विषु की पहले शाम को ‘कणी’ दर्शन की सामग्री इकट्ठी करके सजा ली जाती है.

एक कांसे के डेगची या अन्य किसी बर्तन में चावल, नया कपड़ा, ककड़ी, कच्चा आम, पान का पत्ता, सुपारी, कटहल, आइना, अमलतास के फूल आदि सजा कर रख दिए जाते हैं और इसी बर्तन के पास एक दीपक जलाकर रखा जाता है. दीपक लंबा और ऊंचा होता है.

Bihu 2018: तिथि, महत्व, इतिहास और पकवान, जानें सब कुछ

विषुक्‍कणी झांकी जब आती है तो उसके दर्शन कराने के लिए घर का सबसे बुजुर्ग व्‍यक्ति एक-एक कर घर के सदस्‍यों को सहारा देकर झांकी के पास ले जाता है और उसके दर्शन कराता है. विषुक्‍कणी का दर्शन करने से पहले घर का कोई भी सदस्‍य अपनी आंखें नहीं खोलता.

विषुक्‍कणी का दर्शन करने के बाद घर के बड़े परिवार के सभी सदस्‍यों को तोहफा देते हैं या कुछ पैसे देते हैं. केरल में इसे ‘कैनीट्टम’ कहते हैं. यह चलन बिल्‍कुल ईद की तरह है, जिसमें घर के बड़े परिवार के लोगों को ईदी देते हैं.

केरल के कुछ हिस्‍सों में विषु के दिन पटाखों की आतिशबाजी भी लोग करते हैं. खासतौर से केरल के उत्‍तरी हिस्‍से में विषु को बिल्‍कुल दिवाली की तरह मनाया जाता है. केरल में जहां विषु का त्‍योहार मनाया जाता है, वहीं देश के दूसरे राज्‍यों में इसी दिन कई पर्व मनाए जाते हैं. पंजाब और हरियाणा में बैसाखी मनाई जाती है. असम में बिहू और तमिलनाडु में तमिल पुतानदु या विषु पुण्‍यकालम मनाई जाती है.

Happy Baisakhi 2018: संदेश और वाट्सऐप मैसेज

इस दिन बनाए जाते हैं यह व्‍यंजन
इस दिन घर में सद्य नामक भोज तैयार किया जाता है. जिसे दोपहर में ग्रहण किया जाता है. पकवान प्रायः कद्दू, आम, घिया, करेला, अन्य शाकहाई वस्तुओं और फलों से बनाये जाते हैं. ये सब्भी वस्तुएं इस ऋतु में मिल जाता है.

इस खास मौके पर अपनों को भेजे यह संदेश :

“भुला दो बीता हुआ कल दिल में बसाओ आने वाला कल हंसो और हंसाओ, चाहे जो भी हो पल खुशियां लेकर आएगा आने वाला कल आपका नववर्ष मंगलमय हो. हैप्पी विषु.”

बैसाखी 2018: अमेरिकी के इस राज्य में एक महीने मनाई जाएगी वैसाखी

“पुराना साल सबसे हो रहा है दूर, क्या करें ये ही है कुदरत का दस्तूर, बीती यादें सोचकर उदास न हो तुम, विषु के जश्न में धूम मचाओ तुम. विषु पर्व की शुभकामनाएं.”

“नए साल में गुलाब ढेरों खिलाने हैं, नए साल में गुलाब ढेरों खिलाने हैं, रोते हुए दोस्त सारे मनाने हैं, बंद आंखों में जो चुभ रहे हैं रेत की तरह, बंद आंखों में जो चुभ रहे हैं रेत की तरह, पलको को खोलके आंसू सारे गिराने है. आपको मुबारक विषु का त्योहार.”

“12 महीने आती रहे कामयाबी, 52 सप्‍ताह बनी रहे मुस्‍कान, 365 दिन होती रहे मस्‍ती, 8760 घंटे बनी रहे खुशी, 525600 मिनट बरसे भगवान की कृपा, और 31536000 सेकंड में एक पल भी न आए गम. हैप्पी विषु.”