नई दिल्‍ली. मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने राज्‍य में आगामी होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मंगलवार को पांच धार्मिक नेताओं को राज्‍यमंत्री का दर्जा दे दिया. इसके बाद विपक्ष और मीडिया के निशाने पर शिवराजसिंह आ गए. सीएम चौहान ने जिन पांच संतों को राज्‍यमंत्री का स्‍टेटस दिया है, वे हैं-बाबा, भैय्युजी महाराज, नरमानंदजी, हरिहरानंदजी और पंडित योगेंद्र महंत. बता दें कि इन संतों को सरकार में राज्‍यमंत्री दर्जा देने से एक कमेटी गठित की थी, जिसका काम वृक्षारोपण, जल संरक्षण और नर्मदा संरक्षण और जागरूकता लाना था. इस कमेटी में इन्‍हें विशेष स्‍थान दिया था. शिवराज के इस कदम को विपक्ष ने धार्मिक नेताओं से सियासी फायदे के लिए चली गई चाल बताया है. आइए जानते हैं इन बाबाओं, संत और महंतों के बारे में, जिन्‍हें मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री ने राजनीतिक पद देने की घोषणा की है.

1. कंप्‍यूटर बाबा: 52 साल के कंप्‍यूटर बाबा के नाम से चर्चित स्‍वामी नामदेव त्‍यागी इंदौर के दिगंबर अखाड़ा के प्रमुख हैं. इन्‍हें कंप्‍यूटर बाबा के नाम से इसलिए जाना जाता है कि हमेशा अपने साथ लैपटॉप रखते हैं और काफी टेक सेवी हैं. बाबा का दावा है कि उनका ब्रेन कंप्‍यूटर जैसा काम करता है. बाबा के पास लेटेस्‍ट तकनीक के गैजेट्स होते हैं. बाबा हेलिकॉप्‍टर से भी चलते हैं. 2013 में वह तब सुर्खियों में आए थे जब उन्‍होंने कुंभ के दौरान गंगा में स्‍नान करने के लिए हेलिकॉप्‍टर को घाट पर उतारने की अनुमति अधिकारियों से मांगी थी. कंप्‍यूटर बाबा का राजनीति के प्रति काफी झुकाव है और चुनाव तक लड़ने की तैयारी में रह चुके हैं. एमपी की शिवराज सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा पाने वाले बाबा ने हाल ही में नर्मदा घोटाला यात्रा राज्‍य के पूरे जिलों में निकालने वाले थे.

2. भैय्युजी महाराज: मॉडल से राष्‍ट्रसंत होने का दावा करने वाले भैय्युजी का नाम उदय सिंह देशमुख है. मॉडलिंग की दुनिया से आध्‍यात्‍म और समाजसेवा की राह पकड़ने वाले भैय्यु जी की बड़ी राजनीतिक पहुंच है. जमीदार परिवार में जन्‍मे भैय्युजी के पास विशाल और भव्‍य आश्रम है. बड़े राजनेताओं से लेकर बिजनेस और फिल्‍मी दुनिया की हस्तियों के बीच पकड़ रखने वाले भैय्युजी से पीएम नरेंद्र मोदी, संघ प्रमुख मोहन भागवत, पूर्व प्रेसिडेंट प्रतिभावान, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, मनसे प्रमुख राज ठाकरे, लोकसभा अध्‍यक्ष सुमित्रा महाजन, महाराष्‍ट्र के सीएम देवेंद्र फडवींस समेत कई नेता जुड़े हुए हैं. लग्‍जरी लाइफ स्‍टाइल, महंगी कारों रखने वाले इन संत ने पत्‍नी की मौत के बाद पिछले साल अपनी डॉक्‍टर शिष्‍या डॉ. आयुषी से शादी की थी. पीएम बनने के पहले गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी जब सद्भावना उपवास पर बैठे थे, तब उपवास खत्‍म कराने के लिए भय्यू महाराज भी पहुंचे थे.

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3. हरिहरानंदजी: अमरकंट के एक आश्रम में रह रहे हरिहरानंदजी का प्रभाव एपमी के महाकौशल क्षेत्र में काफी है. हरिहरानंदजी ने जनसभाओं और सेमिनार के जरिए लोगों के बीच पर्यावरण, जल संरक्षण, स्‍वच्‍छता और जैविक खेती को बढ़ाने के लिए काम करते हैं. बता दें कि 50 लोगों के उस कोर समूह में शामिल थे, जिन्‍होंने नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा की अगुआई की थी. इस यात्रा की शुरुआत 11 दिसंबर, 2016 को अमरकंटक से सोंडवा हुई थी और इसका समापन 11 मई, 2017 को अमरकंटक में हुआ था. ये यात्रा 144‍ दिनों चली थी.

4. पंडित योगेंद्र महंत: नर्मदा यात्रा के दौरान कथित घोटाला को लेकर एमपी की बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए थे. उन्‍होंने आगामी 1 से 15 मई के दौरान 45 जिलों में कठित भ्रष्‍टाचार को लेकर रथयात्रा आयोजित करने की घोषणा की थी. राज्‍य में महंत को मंत्री का दर्जा देने पर विपक्ष सवाल उठा रहा है कि उन्‍हें मनाने के लिए मंत्री पद का दर्जा दिया गया है. इंदौर में रहने वाले पंडित योगेंद्र महंत विश्‍व ब्राम्‍हण समाज का राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बताते हैं. उन्‍होंने गुजराती साइंस कॉलेज इंदौर से बीएससी की पढ़ाई की है. वह अक्‍सर धार्मिक आयोजनों में काफी सक्रिय रहते हैं. एमपी में प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सवर्णों की नाराजगी से बचने में महंत बीजेपी के लिए काफी मददगार हो सकते थे.

5. नर्मदानंदजी: एमपी के आध्‍यात्मिक गुरुओ में एक नर्मदानंदजी भी हैं. वह बड़वानी और धार जिले में काफी सक्रिय रहते हैं. धार्मिक यात्राएं और त्‍योहारों पर शोभायात्राएं भी करवाते हैं. पिछले साल मध्‍यप्रदेश के विभिन्‍न हिस्‍सों में कई शोभा यात्रा आयोजित करवाईं और हनुमान जन्‍मोत्‍सव समिति और सनातन धर्म महासभा से जुड़े हैं.