नई दिल्ली. मध्य प्रदेश में 2018 चुनावी साल है. इसलिए सत्तारूढ़ भाजपा सरकार हर वो प्रयास कर रही है जिससे जनता के अधिकांश हिस्से का तुष्टिकरण किया जा सके. ताजा मामला मंगलवार को पांच साधुओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने से संबंधित हैं. इन पांचों साधुओं ने पिछले साल 2 जुलाई को राज्य सरकार द्वारा नर्मदा नदी के किनारे 6.67 करोड़ पौधे लगाने के दावे को महाघोटाला करार दिया था. इसके विरोध में बीते 28 मार्च को पांचों संतों ने संत समाज की बैठक की थी. इसमें सरकार के अभियान को ‘नर्मदा घोटाला रथ यात्रा’ बताते हुए प्रदेश के सभी 45 जिलों में पौधों की गिनती करने की घोषणा की गई थी. लेकिन इससे पहले ही राज्य सरकार ने इन पांचों साधुओं को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया है, जिसके बाद सभी बाबाओं के सुर बदल गए हैं.

संत समाज की बैठक में ‘नर्मदा घोटाला रथ यात्रा’ की घोषणा होते ही सरकार ने तत्काल 31 मार्च को नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में पौधरोपण, जल संरक्षण विषय पर जन-जागरूकता के लिए अभियान चलाने के वास्ते समिति गठित कर दी. इसी समिति के सदस्य पांचों बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है. इन बाबाओं में नर्मदानंदजी, हरिहरानंदजी, कंप्यूटर बाबा, भय्यू महाराज और पं.योगेंद्र महंत शामिल हैं. इन संतों ने सरकार से राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद प्रस्तावित ‘नर्मदा घोटाला रथ यात्रा’ रद्द कर दी है. यह यात्रा एक अप्रैल से निकाली जाने वाली थी. बाबाओं को मिले राज्यमंत्री के दर्जे के तहत इन्हें कई सरकारी सुविधाएं मिलेंगी. 7500 रुपए मासिक वेतन मिलेगा, गाड़ी और एक हजार किलोमीटर का डीजल मिलेगा, 15 हजार रुपए मकान किराया मिलेगा, 3 हजार रुपए सत्कार भत्ता और स्टाफ के अलावा ये बाबा अपना ‘पीए’ भी रख सकेंगे.

राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद बदले संत के सुर
राज्यमंत्री का दर्जा हासिल करने के बाद कम्प्यूटर बाबा ने आज समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा से कहा, ‘हम लोगों ने यह यात्रा निरस्त कर दी है, क्योंकि प्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए साधु-संतों की समिति बनाने की हमारी मांग पूरी कर दी है. अब भला हम यह यात्रा क्यों निकालेंगे.’ यह पूछे जाने पर कि क्या एक संन्यासी के रूप में उनका राज्यमंत्री स्तर की सरकारी सुविधाएं स्वीकारना उचित होगा, उन्होंने जवाब दिया, ‘अगर हमें पद और दूसरी सरकारी सुविधाएंनहीं मिलेंगी, तो हम नर्मदा नदी के संरक्षण का काम कैसे कर पाएंगे. हमें समिति के सदस्य के रूप में नर्मदा नदी को बचाने के लिए जिलाधिकारियों से बात करनी होगी और दूसरे जरूरी इंतजाम करने होंगे. इसके लिए सरकारी दर्जा जरूरी है.’ राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त और ‘नर्मदा घोटाला रथ यात्रा’ के संयोजक योगेंद्र महंत ने स्थानीय अखबारों से बातचीत में कहा, ‘हमारी मांग पर सरकार विचार करेगी. सरकार ने कमेटी बनाकर हमें जिम्मेदारी दी है. अब हम स्वच्छता, पौधरोपण, जल संरक्षण करेंगे. सुझाव देंगे, जिससे नर्मदा का बहाव बढ़े. हम घोटाले की बात नहीं, जन-जागृति करेंगे.’

कंप्यूटर बाबा की गाड़ी और उस पर लगा राज्यमंत्री के दर्जे वाला पर्चा. (फोटोः एएनआई)
कंप्यूटर बाबा की गाड़ी और उस पर लगा राज्यमंत्री के दर्जे वाला पर्चा. (फोटोः एएनआई)

 

15 दिनों के लिए तय था ‘नर्मदा घोटाला रथ यात्रा’ का कार्यक्रम
संत समाज की बैठक में इंदौर के कम्प्यूटर बाबा की अगुवाई में एक अप्रैल से 15 मई तक प्रदेश के प्रत्येक जिले में ‘नर्मदा घोटाला रथ यात्रा’ निकालने की योजना बनाई गई थी. इस दौरान नर्मदा नदी की बदहाली का मुद्दा उठाने की रूप-रेखा तय की गई थी. इस मुहिम की प्रचार सामग्री सोशल मीडिया पर वायरल है, जिससे पता चलता है कि यह यात्रा नर्मदा नदी में जारी ‘अवैध रेत खनन पर अंकुश लगवाने’ और ‘इसके तटों पर किए गए पौधारोपण के घोटाले’ की जांच की प्रमुख मांगों के साथ निकाली जानी थी.

कांग्रेस ने साधुओं की मंशा पर उठाया सवाल
मध्यप्रदेश में पांच बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने पर प्रदेश कांग्रेस ने सरकार की आलोचना की है. साथ ही कंप्यूटर बाबा और योगेंद्र महंत की मंशा पर सवाल उठाए हैं. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा, ‘इन दोनों को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने प्रदेश की भाजपा सरकार के साथ कौन-सी डील के तहत नर्मदा घोटाला रथ यात्रा रद्द कर दी है. क्या इन्होंने राज्यमंत्री का दर्जा हासिल करने के लिए ही इस यात्रा का एलान किया था.’ वहीं, पार्टी की एक अन्य प्रवक्ता दीप्ति सिंह ने कहा कि यह एक राजनीतिक छलावा है. वोट पाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की साजिश है.

(इनपुट – भाषा)