नई दिल्ली. मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने प्रदेश के पांच साधुओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया है. इनमें सबसे चर्चित कंप्यूटर बाबा हैं जिनके साथ कई साधुओं ने संत समाज की बैठक के बाद नर्मदा नदी के किनारे प्रदेश सरकार द्वारा पौधरोपण अभियान को लेकर सवाल उठाया. सरकार इनके दबाव में आई और मंगलवार को प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने कंप्यूटर बाबा समेत पांच बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया. पांचों बाबाओं में सबसे ज्यादा चर्चित कंप्यूटर बाबा मूल रूप से इंदौर के रहने वाले हैं. इनका असली नाम नामदेव दास त्यागी है. अपने साथ हमेशा लैपटॉप लेकर चलने वाले के कारण ही इनका नाम कंप्यूटर बाबा के रूप में प्रसिद्ध हुआ है. 54 वर्षीय इस साधु के बारे में इनके अनुयायियों का दावा है कि इनका दिमाग कंप्यूटर की तरह तेज है. इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से लगाव के कारण भी कंप्यूटर बाबा खासा जाने-पहचाने जाते हैं.

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कुंभ मेले में हेलिकॉप्टर उतारने को लेकर पहली बार हुई थी चर्चा
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार मध्यप्रदेश सरकार में राज्यमंत्री बनने से पहले भी कंप्यूटर बाबा चर्चा में रहे हैं. तीन साल पहले ही नासिक के कुंभ मेले में घाट पर हेलिकॉप्टर उतारने के कारण कंप्यूटर बाबा चर्चा में आए थे. इसके बाद उन्होंने स्नान किया था. वहीं अपनी राजनीतिक रुचियों के कारण भी मीडिया में इनकी खबरें आती रही हैं. नर्मदा घोटाला रथ यात्रा को लेकर भी कंप्यूटर बाबा सबसे ज्यादा प्रयत्नशील साधुओं में से एक रहे हैं. लंबी दाढ़ी और भरे-पूरे कद काठी वाले कंप्यूटर बाबा राज्यमंत्री का दर्जा पाने के बाद मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी को लेकर जन-जागरूकता अभियान में सहभागिता करेंगे. साथ ही इस संबंध में सरकार द्वारा बनाई गई योजनाओं और कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार करेंगे.

हमेशा लैपटॉप लेकर चलने के कारण इन्हें लोग कंप्यूटर बाबा के नाम से जानते हैं. (फोटो साभारः जी.तास)
हमेशा लैपटॉप लेकर चलने के कारण इन्हें लोग कंप्यूटर बाबा के नाम से जानते हैं. (फोटो साभारः जी.तास)

 

2014 में ‘आप’ के टिकट पर लड़ना चाहते थे चुनाव, अब भाजपा के पाले में
कंप्यूटर बाबा राजनीति में भी दिलचस्पी रखते हैं. वर्ष 2014 में ही उन्होंने राजनीति में उतरने की योजना बनाई थी. इसके लिए उन्होंने भाजपा के खिलाफ आम आदमी पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने का मन बनाया था. ‘आप’ से इन्होंने चुनाव का टिकट भी मांगा था, लेकिन पार्टी ने इनकी मांग अनसुनी कर दी. इसके बाद भी उन्होंने उम्मीद की राह नहीं छोड़ी. इन तीन-चार वर्षों के दौरान उनका रुझान भाजपा के खिलाफ ही रहा. फरवरी 2015 में भाजपा के खिलाफ दिया गया उनका बयान चर्चा में रहा था. उस दौरान कंप्यूटर बाबा ने कहा था, ‘मैं ‘आप’ के साथ इसलिए जाना चाहता हूं क्योंकि भाजपा और आरएसएस ने साधु-संतों के हित में कोई काम नहीं किया है. वे साधु समाज का शोषण करते रहे हैं.’ इस बार भी नर्मदा घोटाला रथ यात्रा के बहाने वह भाजपा सरकार की ही खिलाफत करने की योजना बना रहे थे, लेकिन इससे पहले ही प्रदेश सरकार ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा देकर अपने पाले में कर लिया. अब वह इस ‘सरकार’ को धन्यवाद दे रहे हैं. समाचार एजेंसी एएनआई से कंप्यूटर बाबा ने कहा भी, ‘प्रदेश सरकार ने साधु समाज की मांगें मान ली हैं, इसके लिए सरकार को यह समाज धन्यवाद देता है.’