भोपाल, 29 नवंबर| मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने शासनकाल के 11 वर्ष पूरे होने पर संवाददाताओं से बातचीत में विवादित बयान दे दिया। उन्होंने कहा है, “राजनेताओं और अफसरों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे तो बोझ और बढ़ेगा।” राजधानी के एक होटल में ‘प्रेस से मिलिए कार्यक्रम’ में मंगलवार को चौहान द्वारा राज्य की स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा सुधार होने का दावा किए जाने पर जब पूछा गया कि क्या वजह है कि राज्य के राजनेता और अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं पढ़ते और सरकारी अस्पतालों में इलाज क्यों नहीं कराते?

इस पर चौहान ने कहा, “अगर वे भी सरकारी स्कूलों में जाएंगे तो सरकारी स्कूलों पर बोझ और बढ़ जाएगा।” जब चौहान को लगा कि वह कुछ गलत बोल गए हैं तो उन्होंने अपनी बात संभालते हुए कहा, “जहां तक आपका भाव है, जो आपका भाव है उसको ध्यान में रखकर शिक्षा की गुणवत्ता और कैसे ठीक की जा सकती है, उस पर ध्यान देंगे।” यह भी पढेंः मज़दूर के बैंक खाते से डेबिट हो गए 99 अरब रुपए, बैंक ने उठाया ये बड़ा कदम

गौरतलब है कि राज्य के कई बड़े नेताओं और अधिकारियों के बच्चे देश और देश से बाहर के स्कूलों में पढ़ते हैं, वहीं जब भी कोई बड़ा नेता या उनके परिवार का सदस्य बीमार होता है तो वे सरकारी अस्पतालों के बजाय बड़े निजी अस्पतालों में इलाज कराने जाते हैं। कई नेता और अफसर तो राज्य के भीतर इलाज कराते ही नहीं हैं। उन्होंने राज्य में शिक्षक विहीन स्कूलों के आरोपों को नकारा और लेकिन इस बात को स्वीकारा कि राज्य के कई स्कूल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।

राज्य की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चौहान ने कहा, “राज्य में पहले शिक्षा का बुरा हाल था, जिसे उन्होंने बदला है। उच्च माध्यमिक में 85 फीसदी अंक पाने वाले बच्चे निजी स्कूलों से ज्यादा सरकारी स्कूलों के हैं। जहां तक चिकित्सा का सवाल है, चिकित्सकों की कमी है, मगर नि:शुल्क दवा योजना शुरू की गई है। ह्रदय रोगी बच्चों के नि:शुल्क ऑपरेशन कराए जा रहे हैं, कई अन्य सुविधाएं भी दी जा रही हैं। इसके अलावा रोजगार के अवसरों में भी इजाफा हुआ है, नई-नई कंपनियां प्रदेश में आ रही हैं।”

चौहान ने अपने कार्यकाल की सबसे अहम योजनाओं में ‘लाडली लक्ष्मी योजना’ को गिनाया और कहा कि पेटलावद में हुए विस्फोट की घटना ने उन्हें सबसे ज्यादा विचलित किया था। वह आगामी दिनों में राज्य के प्रतिभाशाली विद्याथिर्यों को उच्च शिक्षा हेतु सुविधाएं देने की योजना बना रहे हैं, इसके लिए 12 जनवरी को विद्यार्थी पंचायत का आयोजन किया है। इसके साथ उनकी नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा भी अहम होगी।

राज्य पर लगातार बढ़ते कर्ज के सवाल पर चौहान ने कहा, “केंद्र सरकार द्वारा तय नियमों के अनुसार ही किसी राज्य को कर्ज लेने का अधिकार है, कोई भी राज्य अपनी जीडीपी का तीन प्रतिशत कर्ज के तौर पर ले सकता है। मध्य प्रदेश भी वही कर रहा है। पूर्ववर्ती सरकार के काल में तो 22 प्रतिशत राशि कर्ज के ब्याज पर जाती थी, मगर अब ऐसा नहीं है।” इस मौके पर जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा, जनसंपर्क विभाग के मुख्य सचिव एस. के. मिश्रा, जनसंपर्क आयुक्त अनुपम राजन भी उपस्थित थे।