भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव का समय जैसे-जैसे करीब आ रहा है, राज्‍य सरकार हर वर्ग पर सौगातों की बरसात करने में लग गई है. क्या बाबू, क्या बाबा और क्या पत्रकार, सभी को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुश करने में लगे हुए हैं. उन्हें इस बात की परवाह नहीं है कि सरकार के खजाने में क्या है और जो वादे किए जा रहे हैं, वे पूरे भी हो पाएंगे या नहीं.

पिछले एक महीने में हुई कई घोषणाएं
‘जंग और प्यार में सब जायज होता है.’ इस मशहूर कहावत को भाजपा और शिवराज ने अगला चुनाव जीतने के लिए अपना आधार बना लिया है. बीते एक माह में की गई घोषणाओं पर ही गौर किया जाए तो पता चलता है कि संविदा कर्मी संस्कृति खत्म होगी, विद्यालयों में पढ़ाने वाले सभी संवर्गो के अध्यापक, शिक्षाकर्मी सभी शिक्षक कहलाएंगे. सेवानिवृत्ति की आयु सीमा बढ़ाकर 60 से 62 वर्ष कर दी गई है. नगर निकाय कर्मचारियों को भी सातवां वेतनमान देने की बात हो रही है.

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सत्‍ता विरोधी लहर से वाकिफ है सरकार
राज्य में बन रही सत्ता विरोधी लहर से भाजपा और मुख्यमंत्री चौहान वाकिफ हैं. तमाम सर्वे भी यही संकेत दे रहे हैं. यही कारण है कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भोपाल में मंगलवार को समन्वय बैठक हुई, जिसमें प्रदेश में पनप रहे असंतोष पर चर्चा हुई. दिल्ली में कार्यरत मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार भारत शर्मा ने कहा, “राज्य में लगभग हर वर्ग में असंतोष पनप रहा है, इसे सरकार जान चुकी है. वैसे भी मध्य प्रदेश के मीडिया को लेकर अन्य स्थानों पर अच्छी धारणा नहीं है और अब सरकार ने आवास निर्माण के कर्ज पर पांच प्रतिशत के अनुदान का ऐलान कर दिया है. पहले ही कई अपात्र लोगों को सरकारी आवास दिए गए, परिवार के सदस्यों के नाम पर चलने वाली वेबसाइटों को लाखों रुपए सालाना के विज्ञापन दिए गए. यह तो मीडिया को भ्रष्ट बनाने की साजिश का हिस्सा है.”

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विपक्षी दल साध रहे निशाना
आम किसान यूनियन के केदार सिरोही ने कहा, “राज्य सरकार जमीनी हालात में सुधार करने की बजाय प्रलोभन का रास्ता अपनाए हुए है. किसानों का कर्जा माफ करने की बात करेगी, मगर फसल का उचित दाम नहीं दिलाएगी. पत्रकारों को लिखने की आजादी नहीं होगी, उन्हें सुरक्षा नहीं मिलेगी, मगर आवास बनाने के लिए कर्ज के ब्याज पर पांच प्रतिशत का अनुदान देगी. इससे सक्षम वर्ग को लाभ होता है, कमजोर आदमी इससे वंचित रह जाता है. सरकार जानती है कि सक्षम को लाभ देने से वह समाज में उसके पक्ष में माहौल बनाता है.” कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुभाष कुमार सोजतिया ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा कि “पत्रकार साथियों की मदद की जानी चाहिए, लेकिन खैरात के रूप में नहीं. राज्य में खजाने की लूट है, जितना लुटवा सकते हैं लुटाओ शिवराज जी. फिर भी सरकार तो कांग्रेस की ही बनेगी.”

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सरकार के फैसलों पर अपने भी कस रहे तंज
इतना ही नहीं राज्य सरकार ने पांच बाबाओं को राज्य मंत्री का दर्जा दे दिया है. इनमें से एक भय्यू महाराज ने इसे स्वीकार नहीं किया. कंप्यूटर बाबा तो घोषणा के बाद ही राज्यमंत्री के रंग में नजर आने लगे. बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा देने पर उनकी योग्यता पर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने सवाल उठाया तो सरकार के मंत्री जालम सिंह पटेल ने ही शंकराचार्य को शंका चार करार दे दिया.

अब देखना होगा कि बाबू, बाबा, किसान, पत्रकार को बहलाने की शिवराज की कोशिश कितनी कारगर होती है. सच सामने आता है या उसे प्रलोभन की छाया में दबाने के अस्त्र का काम करता है.

इनपुट: एजेंसी