मुंबई.. मंत्रालय परिसर में आत्महत्या के प्रयासों के लिए वहां के प्रशासन को जिम्मेदार बताते हुए राकांपा के एक एमएलसी का कहना है कि यह नौकरशाहों का काम है कि वह नियमित रूप से लोगों से मिलें और उनकी समस्याएं दूर करें. किरन पावस्कर का कहना है कि मंत्रियों से आशा नहीं की जा सकती है कि वह रोज लोगों से मिलेंगे. राज्य सचिवालय भवन में सुरक्षा जाली लगाने से लोग आत्महत्या जैसा कदम उठाना बंद नहीं करेंगे, इसके लिए उनकी समस्याओं का समाधान करना होगा.

महाराष्ट्र में राज्य सचिवालय भवन को मंत्रालय कहा जाता है. एमएलसी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार एक विस्तृत जन-कल्याणकारी नीति बनाने में असफल रही है, जिसके कारण लोग आत्महत्याएं कर रहे हैं. पावस्कर ने पीटीआई को बताया, मंत्रियों से रोजाना आगंतुकों से मिलने की आशा नहीं की जा सकती है. यह अधिकारियों की जिम्मेदारी है, जिसके लिए उन्हें वेतन दिया जाता है.

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विपक्षी दल के नेता ने दावा किया कि सरकार अपने राजस्व का 61 प्रतिशत हिस्सा आईएएस और आईपीएस सहित अन्य अधिकारियों का वेतन देने पर खर्च करती है. उनका कहना है, लोगों से रोजाना मिलना और उनकी समस्याओं को हल करने का काम सचिवों और अवर सचिवों का है.

उन्होंने कहा, यदि सचिव अपना काम करने में असफल रहते हैं तो मुख्य सचिव को उन्हें जवाबदेह ठहराते हुए निलंबित कर देना चाहिए. एमएलसी ने कहा, वर्तमान में, सरकारी अधिकारी लोगों की शिकायतों को संबंधित मंत्रियों तक पहुंचाने की जहमत नहीं उठाते हैं, और न ही लोगों तक फीडबैक पहुंचाते हैं. उन्होंने भाजपा-नीत सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए.