मुंबई. नवी मुंबई निवासी एक महिला ने अपने 63 वर्षीय बीमार और कोमा में पड़े पति के बैंक खाते का इस्तेमाल करने और उसका संरक्षक बनाए जाने की अनुमति के लिए बंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है. पिछले हफ्ते दाखिल की गई याचिका में महिला ने ऐसे मरीजों के अधिकारों से जुड़े किसी विशिष्ट कानूनी प्रावधान के अभाव में खुद को पति का संरक्षक नियुक्त करने की अपील की है ताकि वह पति के खाते का इस्तेमाल कर उसका चिकित्सकीय खर्च उठा सके.

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उच्च न्यायालय ने कल ठाणे कलेक्ट्रेट के उप-संभागीय मजिस्ट्रेट को इस व्यक्ति के स्वास्थ्य के बारे में रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था जो एक सार्वजनिक उपक्रम के महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत हुये हैं. पीठ ने इसके साथ ही याचिकाकर्ता को दोनों बेटियों को भी अपने पिता के खाते के इस्तेमाल के लिए मां को मिलने वाली अनुमति पर अनापत्ति जताने वाला हलफनामा देने का निर्देश दिया है.

न्यायमूर्ति एस एम केमकर की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ इस महिला की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उसने दावा किया था कि उसका पति एक महीने से ज्यादा वक्त से कोमा में है. महिला ने अपनी याचिका में नवी मुंबई के अपोलो अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट की रिपोर्टें भी जमा की हैं जिसमें उसके पति की बीमारी का जिक्र है और उनके निष्क्रिय अवस्था में होने की पुष्टि की गई है.