जिम्बाब्वे. जिम्बाब्वे में 15 नवंबर (एएफपी) वर्ष 1980 में ब्रिटेन से आजाद होने के बाद से ही सत्ता पर काबिज राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे के शासन पर पकड़ को लेकर उठे सवालों के बीच बुधवार को देश की राजधानी हरारे के पास सेना के सशस्त्र बल सैन्य वाहन के साथ देखे गए है.

एक प्रत्यक्षदर्शी महिला ने बताया कि वे मुगाबे के शासन की महत्वपूर्ण समर्थक रही हैं. सेना और 93 वर्षीय नेता के बीच तनाव काफी बढ़ गया है और बुधवार की सुबह तड़के बोरोडाले में लंबे समय तक गोलीबारी हुई है.

आपको बता दें कि जिम्बाब्वे में मुगाबे की जेडएएनयू-पीएफ पार्टी ने सेना प्रमुख जनरल कांन्सटैनटिनो चिवेंगा पर मंगवार को राष्ट्रद्रोह संबंधी आचरण का आरोप लगाया था. इस विवाद ने राष्ट्रपति मुगाबे के लिए ऐसे समय में बड़ी परीक्षा की घड़ी पैदा कर दी है. जबकि जिम्बाब्वे के हालात पहले से ही खराब चल रहा था. सेना प्रमुख जनरल चिवेंगा ने मांग की है कि मुगाबे के उपराष्ट्रपति एमरसन मनांगाग्वा की पिछले सप्ताह की गई बर्खास्तगी को वापस लें.

जेडएएनयू-पीएफ ने कहा कि सेना प्रमुख चिवेंगा का रुख स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय शांति को बाधित करने वाला है. यह उनकी ओर से राष्ट्रद्रोह संबंधी आचरण की ओर इशारा करता है क्योंकि इसका मकसद विद्रोह को भड़काना है. मनांगाग्वा को बर्खास्त किए जाने से पहले उनका मुगाबे की पत्नी ग्रेस (52) से कई बार टकराव भी हुआ था. ग्रेस को अगले राष्ट्रपति के लिए मनांगाग्वा का प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है.

हालांकि जिम्बाब्वे की आन्तरिक हालात खराब होने के मद्देनजर हरारे में अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को चेताया है. कि जारी राजनीतिक अस्थिरता के कारण वे ” शरण ले लें. सेना प्रमुख चिवेंगा ने संभावित सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनी भी दी थी. इसके मद्देनजर हरारे के बाहर सशस्त्र वाहनों ने निवासियों को चिंतित कर दिया है.

हालांकि सेना के प्रवक्ता ने इस बात का खंण्डन करते हुए एक बयान जारी कर कहा है कि यह किसी तरह का सैन्य अधिग्रहण नहीं है।