नई दिल्ली: वैज्ञानिकों ने ऐसा विचित्र तारा खोजा है जो पचास साल के अंतराल पर विस्फोट तो करता है लेकिन मरता नहीं है. इससे पहले खगोलविदों ने हजारों ऐसी घटनाओं का अध्ययन किया था, जिसमें तारे की मृत्यु विस्फोट से हो जाती थी. तारे के विस्फोट की इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में सुपरनोवा कहा जाता है.

इस अमर तारे की खोज हवाई की केक वेधशाला से जुटाए गए आंकड़ों के अध्ययन के बाद की गई. लॉरेंस बर्कले नेशनल लैबोरेटरी के इस शोध के मुख्य वैज्ञानिक पीटर नुजेंट ने कहा, इससे पहले पिछले दो दशक में करीब पांच हजार सुपरनोवा देखे गए हैं. इस तारे का विस्फोट भी हाइड्रोजन युक्त अन्य विस्फोट जैसा ही था. लेकिन तारे की चमक फीकी पड़ने की गति पांच गुना तक कम थी.

इस सुपरनोवा को पहली बार पालोमर ट्रांजिएंट फैक्ट्री ने 2014 में खोजा था. कई महीनों बाद खगोलविदों ने पाया कि यह दोबारा बढ़ रहा है. इसके बाद सुपरनोवा से जुड़ी पुरानी जानकारियों का आकलन करने पर पाया गया कि 1954 में ठीक इसी जगह एक विस्फोट और हुआ था.

शोधकर्ता आइएर अर्केवी ने कहा, ‘इस सुपरनोवा ने तारों की मृत्यु के हमारे पूर्व सिद्धांत को पूरी तरह से पलट दिया. यह सूर्य से 50 गुना अधिक बड़ा था. शायद यही कारण है कि विस्फोट के बाद भी यह तारा चमकता है. अधिक जानकारी जुटाने के लिए हम अभी इस सुपरनोवा की निगरानी कर रहे हैं.’ शोध के परिणाम को नेचर जर्नल में प्रकाशित किया गया है.