नई दिल्लीः हिंदी सिनेमा के पहले सुपर स्टार कहे जाने वाले कुंदन लाल सहगल की 114वीं जयंती पर गूगल उन्हें डूडल बना कर याद कर रहा है. अपने करियर में ए.एल सहगल ने 36 फिल्मों में काम किया और 200 से ज्यादा गाने गाए. कुंदन लाल सहगल का जन्‍म जम्‍मू में हुआ. उनके पिता अमरचंद जम्‍मू कश्‍मीर के राजा के तहसीलदार थे.

मां की वजह से हुआ संगीत से प्रेम
संगीत की तरफ सहगल का झुकाव अपनी मां केसर बाई की वजह से हुआ. वह संगीत प्रेमी थीं. वह सहगल को ऐसे कार्यक्रमों में ले जातीं जहां शास्‍त्रीय संगीत पर आधारित भजन कीर्तनों का आयोजन होता था.

‘चमड़ा बाबू’ के नाम से फेमस हुए
प्रारंभिक शिक्षा के बाद सहगल ने स्‍कूल छोड़ दिया. वह मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर टाइमकीपर की नौकरी करने लगे. उसके बाद कानपुर आए और यहां चमड़े के कारोबारियों के यहां नौकरी की, यहां गजल की महफिलें लगाने वाले सहगल ‘चमड़ा बाबू’ के नाम से फेमस हो गए.

1940 में वे मुंबई गए और अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की. यहां उन्‍हें कई बार रिजेक्‍शन भी झेलनी पड़ी. हालांकि बाद में लोग उन्‍हें संगीत का बादशाह मानने लगे और वो अपने फन के दम पर बॉलीवुड के पहले सुपरस्‍टार बने.

ड्राइवर की बेटी की शादी…
कहते हैं कि केएल सहगल ने एक बड़े संगीत आयोजन में इसलिए गाने से मना कर दिया था क्योंकि उस दिन उन्हें अपने ड्राइवर की बेटी की शादी में गाने के लिए जाना था. एक बार किसी की मदद के लिए उन्होंने बाजार में घूम-घूमकर गाना गाया और चंदा इकट्ठा किया था.

सहगल की लोकप्रियता का आलम ये रहा है कि अपने दौर के सबसे मशहूर रेडियो चैनल रेडियो सीलोन ने करीब 48 साल तक हर सुबह अपना एक कार्यक्रम सहगल के गानों पर ही रखा था. महज 43 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन इस छोटे से दौर में उन्होंने शोहरत की बुलंदियां हासिल कर ली थीं

साल 1930 मे कोलकाता के न्यू थियेटर के बी.एन.सरकार ने सहगल को 200 रुपये मासिक पर अपने यहां रखा लिया था. सहगल की मुलाकात संगीतकार आर.सी.बोराल से हुई. बतौर अभिनेता सहगल को वर्ष 1932 में प्रदर्शित एक उर्दू फिल्म मोहब्बत के आंसू  में अभिनय का मौका मिला. इसके बाद 1932 में सुबह का सितारा और जिंदा लाश फिल्म भी आई. इस फिल्म से सहगल कुछ खास ना कर पाए. 1933 मे प्रदर्शित फिल्म पुराण भगत की कामयाबी के बाद बतौर गायक सहगल कुछ हद तक फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में सफल हो पाए थे. 1937 में सहगल को बांग्ला फिल्म दीदी से अपार सफलता मिली.

1942 में सहगल की पहली बॉलीवुड फिल्म भक्त सूरदास आई. इसके बाद 1943 में तानसेन, 1944 में मेरी बहन, भंवरा आई. इसेक बाद तदबीर, कुरुक्षेत्र, शाहजहां, उमर खैय्याम और परवाना आई थी. उन्होंने जब दिल ही टूट गया, हम जी कर क्या करेंगे, बाबुल मोरा, दिल से तेरी निगाह, दुख के अब दिन, मैं क्या जानूं क्या, एक बंगला बने न्यारा, दिया जलाओ, सो जा राजकुमार जैसे 200 गाने गाए.