आपके दिमाग में अक्सर यह बात आती होती होगी कि आखिर वह कौन-सा जादू है, जिसकी वजह से पककर फूलते ही रोटी की दो परतें बन जाती हैं। लेकिन इसका कारण जानने ना जानने से कोई फर्क तो पड़ता नहीं है। रोटी तो खाने के लिए मिल ही जाती है इसलिए हमने इसका कारण जानने पर ज्यादा जोर नहीं दिया। तो चलिए आज हम इस पहेली को सुलझाते हैं कि आखिर बेलते समय तो ऐसा बिल्कुल नहीं लगता की रोटी के दो भाग हैं लेकिन फूलने पर यह कैसे दो भागों में बंट जाती है।

दरअसल ऐसा कार्बन डाईऑक्साइड गैस की वजह से होता है। असल में होता यह है कि रोटी बनाने के लिए जब शुरुआत में हम आटे में पानी मिलाकर उसे गूंथते हैं, तब गेहूं में उपस्थित प्रोटीन एक लचीली परत बना लेती है, जिसे लासा या ग्लूटेन कहते हैं। लासा की विशेषता यह होती है कि वह अपने भीतर कार्बन डाईऑक्साइड सोख लेता है।

इसी कार्बन डाईऑक्साइड के कारण आटा गूंथने के बाद फूला रहता है और रोटी को सेंकने पर लासा के भीतर मौजूद कार्बन डाईऑक्साइड बाहर निकल कर फैलने की कोशिश करती है। इस कोशिश में वो रोटी के ऊपरी भाग को फुला देता है और जो भाग तवे के साथ चिपका होता है, उस तरफ एक पपड़ी-सी बन जाती है।
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ठीक इसी प्रकार दूसरी तरफ से सेंकने पर रोटी की दूसरी तरफ भी पपड़ी बन जाती है। इस तरह इन दो पपडिय़ों के भीतर बंद कार्बन डाईऑक्साइड गैस और गर्म होने से पैदा हुआ भाप रोटी की दो अलग-अलग परतें बना देती है।

यही कारण है कि गेहूं की रोटी तो खूब फूलती है, मगर जौ, बाजरा, मक्का की रोटी या तो नहीं फूलती या बहुत कम फूलती है और इनमें स्पष्ट रूप से दो परतें भी नहीं बन पातीं, क्योंकि इन अनाजों में लासा की कमी होती है। कार्बन डाईऑक्साइड गैस बनने के लिए आटे में लासा का होना जरूरी है जो कि गेहूं के आटे में पर्याप्त पाया जाता है।