इस बार कृष्ण जन्माष्टमी की तारीख और पूजा के सही समय को लेकर लोगों में संशय की स्थिति बनी हुई है. कुछ लोगों का मानना है कि जन्माष्टमी 14 अगस्त को है और कुछ 15 अगस्त बता रहे हैं. ऐसे में लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि व्रत किस दिन करें. हम आपको बताते हैं कि जन्माष्टमी की तारीख को लेकर यह संशय क्यों है और साथ ही पूजा और व्रत का सही दिन और समय भी बताएंगे.

जन्माष्टमी की तारीख पर दुविधा क्यों?
जन्माष्टमी की तारीख को लेकर दुविधा की वजह यह है कि 14 अगस्त को पूरे दिन सप्तमी तिथि है. लेकिन शाम 7 बजकर 35 मिनट से अष्टमी तिथि का आरंभ हो जा रहा है. जबकि अष्टमी तिथि 15 अगस्त को पूरे दिन है और शाम 5 बजकर 42 पर नवमी तिथि लग रही है.

किस दिन करें व्रत?
गृहस्थों को उस दिन व्रत रखना चाहिए जिस रात अष्टमी तिथि लग रही हो. इसके अनुसार 14 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रख सकते हैं. जो लोग वैष्णव और साधु संत हैं वह 15 अगस्त को अष्टमी तिथि में व्रत रख सकते हैं. 14 अगस्त की रात श्री कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाकर पूजा करें.

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जन्माष्टमी का व्रत और पूजन विधि
भगवान श्री कृष्ण का जन्माष्टमी व्रत फलदायी है. इस दिन प्रातः काल उठकर व्रत का अनुष्ठान करना चाहिए. पूरे दिन व्रत रखने के बाद रात को लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाएँ. धूप, दीप, नैवेद्य से भगवान की पूजा करें और भोग लगाएं. श्री कृष्ण की आरती करें और फिर पूरे परिवार के साथ भजन गाएं. इस सबके बाद ही व्रत का पारण करें. ऐसा करने पर श्री कृष्ण की कृपा बनी रहती है और सारे दुख दूर हो जाते हैं.

By Aditya Dwivedi