बुधवार  को देश के उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया कि सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान होगा और इसके सम्मान में सभी लोगों को 52 सेकेंड तक खड़े रहना होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिनेमाघरों में फिल्म से पहले राष्ट्रगान की परंपरा अभी से शुरू नहीं हुई। इसका बहुत पुराना इतिहास है।

जानकारों की मानें तो इसकी शुरुआत 1962 में भारत और चीन के युद्ध के बाद की गई थी। उस दौरान फिल्म जगत में देशभक्ति फिल्मों की बहार सी आ गई थी। इसी के चलते सिनेमाघरों  के मालिकों ने फिल्म दिखाने से पहले राष्ट्रगान करवाने का निर्णय लिया था। इसी दौरान ऐसी खबरे भी आईं की कई लोग राष्ट्रगान के वक्त खड़े नहीं होते हैं जिससे इसका अपमान होता है। इसके बाद 1975 में सरकार ने इस पर रोक लगा दी। यह भी पढ़ें: मॉस्को: राष्ट्रगान के दौरान चलते रहे मोदी, अफसर ने हाथ पकड़ के रोका

30 नवंबर को आए सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर सोशल मीडिया पर मिली जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। एक ओर जहां कई लोगों ने इस बात का समर्थन किया वहीं कई लोगों ने इसका यह कह कर विरोध किया कि उन पर जबरन देशभक्ति थोपी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फरमान में शारीरिक रूप से असक्षम और दिव्यांग जनों को रियायत भी दी है।