नई दिल्ली| कई बार सुनने में आता है कि सुरक्षाकर्मियों से भी ज्यादा खतरनाक हथियारों से लैस रहते हैं आतंकवादी. ऐसे में कई बार आतंकवादी बचने में सफल रहते हैं. हम आपको बता रहे हैं आतंकियों की सबसे पसंदीदा बंदूक एके-47 से जुड़ी कुछ रोचक बातें-

एके-47 जैसी खतरनाक बंदूक बनाने वाले सख्स का नाम मिखाइल क्लैशनिकोव है, मिखाइल रूसी जनरल के साथ-साथ अविष्कारक और नेवी इंजीनियर भी थे. 10 नवंबर 1919 को जन्मे मिखाइल की एके 47 बनाने के पीछे की कहानी कुछ ऐसी है कि मिखाइल काफी बीमार रहते थे. एक दिन इलाज कराने वो अस्पताल पहुंचे जहां कुछ सैनिक वहां खड़े थे और वो सैनिक सोवियत हथियारों की बुराई कर रहे थे. इसके बाद मिखाइल को आइडिया आया कि क्यों न नई बंदूक बनाई जाए. उसी का नतीजा एके-47 है.

मिखाइल ने एके-47 के अलावा एकेएम, एके-74, एके-101, एके-103, एके-105, एके-12, आरपीके, पीके मशीन गन जैसे खतरनाक हथियार भी बनाए, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में एके-47 ही रही. एके-47 का पूरा नाम ऑटोमैटिक क्‍लाशनिकोव-47 है. क्‍‍लाशनिकोव नाम देने की पीछे की वजह भी यही रही कि इसे मिखाइल क्‍लाशनिकोव ने बनाया और ये बंदूक 1947 में बनाई गई इसलिए लास्ट में 47 लगा दिया गया.

ठंड में मोटे ग्‍लव्‍स पहनकर बंदूक चलाना कठिन था इसलिए इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसे ग्‍लव्‍‍‍स पहनकर भी आसानी से चलाया जा सके. एके-47 के दो तरह के मॉडल हैं. एक ऑटोमैटिक और एक सेमिऑटोमैटिक. ऑटोमैटिक वाली बंदूक से एक बार ट्रिगर दबाते ही पूरी गोलियां निकल जाती हैं जबकि सेमिऑटोमैटिक से एक बार ट्रिगर दबाने पर एक ही गोली चलती है. ऑटोमैटिक गन से एक बार ट्रिगर दबाने पर एक सेकंड में 10 गोलियां चलती हैं.

इस खतरनाक हथियार को बनाने वाले मिखाइल इसी हथियार की वजह से बहरे भी हो गए. आपको बता दें कि मिखाइल एके-47 को एक लाख  बार चला चुके हैं और उसकी आवाज इतनी तेज थी कि उसकी वजह से वो बहरे हो गए थे.

एके-47 का सबसे ज्यादा इस्तेमाल अफगानिस्तान में आतंकी संगठन तालिबान करता है और मिखाइल  ने कहा था कि मुझे अपने आविष्कार पर गर्व है, लेकिन इस बात से दुखी हूं कि इसे आतंकी इस्तेमाल करते हैं.

आपको ये बात तो अच्छे से पता होगी कि आम लोगों के लिए ये बंदूक गैरकानूनी है औऱ इसके लिए कठोर सजा भी है. इस समय लगभग 10 करोड़ दुनिया मे हैं और 3 फुट की इस बंदूक का वजन सिर्फ 4 किलो होता है.