अपने गली-मोहल्लों में अक्सर देखा होगा, चलती गाड़ी के पीछे कुत्ते भौंकते हुए दौड़ने लगते हैं. कुत्ते अक्सर बाइक सवार लोगों के साथ ऐसा नहीं करते लेकिन गाड़ी के पीछे हमेशा वो दौड़ने लगते हैं. क्या कभी आपके मन में सवाल आया है कि ऐसा होता क्यों है? अगर नहीं तो ये लेख पढ़ना आपके लिए बेहद जरूरी है.

इस पूरे मामले की वजह बेहद दिलचस्प है. आपने फिल्मी डायलॉग सुना ही होगा जिसमें ‘कुत्तों का इलाका’ शब्द इस्तेमाल किया गया होगा. अब मुख्य विषय पर आते हैं. हर कुत्तों की एक खास आदत होती है. वो मोहल्ले में खड़ी गाड़ियों के ईर्द गिर्द ही रहते हैं. गाड़ी पर सोना, चढ़ना और यहां तक की उसपर सु सु कर देना उनकी आदत में होता है.

ऐसा कर वो जताना और बताना चाहते हैं कि ये उनका इलाका है. मान लीजिए आप रहते हैं गाजियाबाद के किसी मोहल्ले में और आपका ऑफिस है नोएडा के किसी सेक्टर में… अब गाजियाबाद में आपके मोहल्ले वाला कुत्ता आपको पहचानता है क्योंकि वहां आपका रोज आना जाना है. जैसे ही आप नोएडा के अपने दफ्तर पहुंचते हैं वहां का कुत्ता आपकी गाड़ी पर सु सु कर देता है और उस गाड़ी को अपना बना लेता है. लेकिन जैसे ही आप अपने घर पहुंचेगे तो गाजियाबाद में मोहल्ले वाला कुत्ता उस सु सु को सूंघ लेता है और पता कर लेता है कि इसपर किसी और कुत्ते का डीएनए है.

इसके बाद वो कुत्ता आपकी गाड़ी के पीछे भागना शुरू कर देता है क्योंकि उसे बर्दाश्त नहीं होता कि कोई और कुत्ता उसके इलाके में एंटर करे. हमेशा गाड़ियों के आसपास रहने वाले कुत्ते गाड़ी स्टार्ट होते ही नाराज हो जाते हैं. उन्हें लगता है जैसे उनका घर दूर जा रहा है. इसी कोशिश में वो कई बार गाड़ी के नीचे कुचलकर अपनी जिंदगी गंवा देते हैं. ऐसे में मरने वाले कुत्तों के परिजनों और पैरेंट्स की आंखों में ‘हादसा’ करने वाली गाड़ी की तस्वीर बस जाती है. जब भी कुत्ते उस रंग की या कोई भी कार को देखते हैं तो बदला देने की नीयत से उसपर टूट पड़ते हैं.