बॉन| वैज्ञानिकों ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता में कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के लिए उत्तरदायी कार्बन डाई-ऑक्साइड का उत्सर्जन इस साल दो प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है. वर्ष 2014 से इसके उत्सर्जन में कोई इजाफा नहीं हुआ था. यह पिछले 3 साल तक स्थिर रहा है.

यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया के टिंडल सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज रिसर्च की निदेशक और इस प्रमुख अध्ययन की मुख्य लेखिका कोरिन लि क्यूर ने कहा, ‘‘यह बहुत निराशाजनक है.’’ वर्ष 2015 के पेरिस समझौते में ग्लोबल वार्मिंग को दो सेल्सियस से नीचे रखने का आह्वान किया गया था. जलवायु नीति पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की सलाहकार और अनुसंधान के सह-प्रायोजक फ्यूचर अर्थ की कार्यकारी निदेशक एमी ल्यूर्स ने कहा, ‘‘तीन वर्ष के अंतराल के बाद उत्सर्जन में वृद्धि की खबर मानव जाति के लिए बहुत पीछे जाने के समान है.’’ बॉन में हजारों राजनयिक पेरिस समझौते के ‘नियमों’ को लेकर चर्चा कर रहे हैं. यह कानून 2020 में प्रभावी हो जाएगा.

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एक हिंदी पोर्टल की खबर के अनुसार भारत का कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन इस साल 2 फीसदी तक बढ़ा है. जबकि पिछले दशक में 6 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि देखी गई थी. बता दें कि हाल के दिनों में भारत की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. लोग आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी की शिकायत करने लगे हैं.

 आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले ही संयुक्त राष्ट्र ने आगाह करते हुए कहा कि पैरिस जलवायु समझौते के तहत निर्धारित किए गए लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है. कार्बन डाई-ऑक्साइड के उत्सर्जन को रोका नहीं गया तो यह भयानक हो सकता है.

(भाषा इनपुट)