जयपुर: राजस्‍थान में विवादों में रहे एक सीनियर आईपीएस इंदु कुमार भूषण को सेवा से बर्खास्‍त कर दिया गया है. 1989 बैच के इस अखिल भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी भूषण के खिलाफ मीडिया में अपने साथियों पर गंभीर भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाने का आरोप है. उन्होंने आरोप में अपने साथियों पर गैरकानूनी साधनों के माध्यम से धन जुटाने का आरोप लगाया था. एक विवाद में 52 साल के भूषण को पांच बार एपीओ प्रतीक्षारत पोस्टिंग ऑर्डर पर रखा जा चुका है और वे अभी भी इसी स्थिति में थे. बता दें कि राजस्थान में ऐसा पहली बार हुआ है कि एक आईपीएस अधिकारी को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बर्खास्त किया है.

नवंबर 2017 में राजस्थान के आईपीएस अधिकारियों के प्रदर्शन का आंकलन करने के बाद कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय ने यह आदेश जारी किया है. 29 मार्च की तारीख वाले आदेश में कहा गया है कि गृह मंत्रालय ने जनहित में भूषण को सेवानिवृत्त करने का फैसला किया है.

विवादों का केंद्र रहे भूषण
पिछले साल भूषण ने राज्‍य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों पर भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाए थे. इसके पहले 2016 में उन्‍हें हैदराबाद स्थित नेशनल पुलिस अकादमी से इसलिए वापस भेज दिया गया था क्‍योंकि उन्‍होंने तेलंगाना के राज्‍यपाल ईएसएल नरसिम्‍हन के नॉलेज पर सवाल उठाए थे. राज्‍यपाल नरसिम्‍हन एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रहे हैं. 2013 में आईपीएस भूषण पर अपने गनमैन और ड्राइवर से मारपीट और अभद्रता का आरोप लगा था.

इंजीनियरिंग डिग्री धारक आईपीएस
आईपीएस इंदु कुमार भूषण इंजीनियरिंग डिग्री धारक हैं और बिहार के मूल निवासी हैं. वह एसपी सीआईडी, एसपी हरिजन अत्‍याचार, डीआईजी ट्रैफिक, आईजी कानून, आईजी एडमिनिस्‍ट्रेशन और एडीजी जेल रह चुके हैं.

राजस्‍थान सरकार भेजा था प्रस्‍ताव
राजस्‍थान सरकार ने पिछले साल नवंबर में एडीजी रैंक के अफसर भूषण को हटाने के लिए एक प्रस्‍ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा था. राजस्‍थान शासन के कार्मिक विभाग के ज्‍वाइंट सेक्रेटरी अरविंद कुमार पोसवाल ने बताया कि इस प्रस्‍ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 29 मार्च को एडीजी इंदु कुमार भूषण को बर्खास्‍त के लिए स्‍वीकार कर लिया और आज से इसे अमल में लाया गया है.