नई दिल्लीः ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 4 से 15 अप्रैल तक 21वां कॉमनवेल्थ गेम्स होना है. इन गेम्स के लिए चुने गए 218 भारतीय खिलाड़ियों के दल में 16 ऐसे हैं जो पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं. इन 16 में से 10 एथलीट इस बार भी देश के लिए सोना जीत सकते हैं. गौरतलब है कि पिछले तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत 215 मेडल जीत चुका है. 2006 में 50, 2010 में 101 और 2014 में 64 मेडल भारत ने जीते थे. बैडमिंटन, शूटिंग, बॉक्सिंग और वेटलिफ्टिंग से भारत को गोल्ड की उम्मीदे हैं. इन खेलों में अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का मिक्सप देखने को मिल रहा है. कुछ ऐसे खिलाड़ियों के बारे में जानते हैं जो इस कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को सोना दिला सकते हैं.

1.पीवी सिंधु (बैडमिंटन)

Sindhu PV Newsकॉमनवेल्थ गेम्स से पहले टखने में मोच से परेशान पीवी सिंधु को उम्मीद है कि वह बैडमिंटन की व्यक्तिगत स्पर्धाएं शुरू होने तक फिट हो जाएंगी. उन्हें पूरा विश्वास है कि भारत इन खेलों में कई पदक जीतने में सफल रहेगा. सिंधु को चार साल पहले कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था, लेकिन तब से लेकर अब तक काफी कुछ बदल चुका है और वह भारत की चोटी की शटलर है और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक की प्रबल दावेदार हैं. उन्होंने कहा कि पिछली बार मैंने कांस्य पदक जीता था और इस बार मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती हूं. मैं कोई संख्या नहीं बता सकती, लेकिन निश्चित तौर पर इस बार हम काफी पदक जीतेंगे. सिंधु उन युवा खिलाड़ियों में शामिल जिनसे भारत को ज्यादा उम्मीदें हैं. उनका मुकाबला 12 अप्रैल को सुबह 4.30 से है.

2.साक्षी मलिक

Sakshi Malik (GettyImages)
Sakshi Malik (GettyImages)

2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में साक्षी मलिक ने देश को कई पदक दिलाए. उनका कहना है कि इस बार मैं ऑस्ट्रेलिया से पदक का रंग बदलकर लौटूंगी. मेरा निशाना सिर्फ और सिर्फ गोल्ड पर है. साक्षी राष्ट्रमंडल खेलों में महिला कुश्ती के 62 किलोग्राम भारवर्ग में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. उनका कहना है कि गोल्डकोस्ट में मैं अपनी सबसे बड़ी चुनौती कनाडा के रेसलर को मानती हूं. काफी कठिन चुनौती मिलने वाली है मुझे कनाडा की महिला रेसलरों से. इस चुनौती को भेद संकू इसके लिए मैं सौ फीसदी मेहनत कर रही हूं. उम्मीद है मैं स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहूंगी. मेरा काम अपना सर्वश्रेष्ठ देना है, बाकि काफी कुछ किस्मत पर भी डिपेंड करता है. मुकाबला 14 अप्रैल को सुबह 6 बजे होगा.

3.जीतू राय (शूटिंग)

File image of Jitu Rai
2014 में ग्लास्गो कॉमनवेल्थ में स्वर्ण जीता. वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत, दो विश्व कप में रजत, इंचियोन एशियाड में स्वर्ण और कांस्य पदक अपने नाम किया. 2015 वर्ल्ड कप में कांस्य और 2017 ब्रिस्बेन कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में दो कांस्य पदक पर निशाना साधा. हालांकि 2016 रियो ओलिंपिक में 10 मी एयर पिस्टल में 8वें और 50वें मी एयर पिस्टल में 12वें स्थान पर रहे थे. इससे निराश जीतू ने फैसला किया कि वे सिर्फ 10मी एयर पिस्टल का अपना ध्यान लगाएंगे. गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ में जीतू के पास मौका है कि वे ओलिंपिक की हार को भूलाकर बड़े प्लेटफॉर्म पर एक बार फिर खुद को साबित करें और अपना खिताब बरकरार रखें. 30 साल के जीतू दो इवेंट में हिस्सा ले रहे हैं. उनकी शूटिंग 9 और 11 अप्रैल को सुबह 4.30 बजे देख सकते हैं.

4.साइना नेहवाल (बैडमिंटन)

saina nehwal
दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल 2010 के प्रदर्शन को साइना नेहवाल गोल्डकोस्ट में भी दोहराना चाहती हैं. राष्ट्रमंडल खेल 2010 में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था. साइना का कहना है कि भारत 2010 में पदक तालिका में दूसरे स्थान पर था. आखिरी दिन हमारे नाम 99 पदक थे और भारतीय हॉकी और बैडमिंटन महिला एकल मुकाबले बाकी थे. मैंने स्वर्ण पदक जीता और हॉकी टीम ने रजत पदक. मुझे तिरंगे के साथ पोडियम पर खड़े होकर इतना अच्छा लगा कि मैं भूल ही नहीं सकती. हालांकि साइना फिलहाल चोटों से खासी परेशान हैं, पिछले 18 महीने उनके लिए कुछ ठीक नहीं रहे. कॉमनवेल्थ के अपने शानदार रेकॉर्ड को बनाए रखना चाहेंगी. उनका मुकाबला 12 अप्रैल को दोपहर 1 बजे है.

5.विकास कृष्णन (बॉक्सिंग)

File photo of Vikas Krishan (AFP)
File photo of Vikas Krishan (AFP)

इस बार उम्मीद टिकी है विकास कृष्णन पर. वह अच्छी फ़ॉर्म में हैं. जहां तक विकास का सवाल है तो उन्होंने अपने पहले एशियन गेम्स ग्वांग्ज़ू में गोल्ड जीता था. गोल्ड कोस्ट गेम्स उनके लिए पहले कॉमनवेल्थ गेम्स हैं. उनका कहना है कि उन्होंने ओलंपिक के अलावा हर प्रतियोगिता में पदक जीता है. लेकिन अब उन्हें उम्मीद है गोल्ड की. हालांकि विकास के लिए पिछला साल कुछ खास नहीं रहा, इस सबको भूलकर वह दमदार प्रदर्शन जरूर करना चाहेंगे. उनका मुकाबला 5 अप्रैल को होगा.

6.संजीता चानू (वेटलिफ्टिंग)

sanjita chanu
पिछले कॉमनवेल्थ खेलों में 48 किलोग्राम की कैटेगरी में गोल्ड और सिल्वर दोनों ही मेडल भारत के नाम रहे थे. उस वक्त महज 20 साल की रहीं संजीता चानू ने भारत की ही मीराबाई चानू को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया था. संजीता ने स्नैच में 77 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 96 किलोग्राम समेत कुला 173 किलोग्राम वजन उठाकर गोल्ड मेडल हासिल किया था. संजीता का यह प्रदर्शन कॉमनवेल्थ खेलों के रिकॉर्ड से बस दो किलाग्राम ही कम था. गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में संजीता के कंधों पर बड़ी जिमेमदारी है. अब वह बदली हुई कैटेगरी यानी 53 किलोग्राम की कैटगरी में हिस्सा ले रही है और उनपर इस नई कैटगरी में भी पिछला यानी गोल्ड मेडल वाला प्रदर्शन दोहराने की जिम्मेदारी है. उनका इवेंट 6 अप्रैल को सुबह पांच बजे होगा.

7.नीरज चोपड़ा (जेवलिन थ्रो)

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नीरज चोपड़ा ने दो साल पहले पोलैंड में अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में जेवलिन थ्रो में भारत के लिए इतिहास रच दिया था. उस समय 18 साल के नीरज ने 86.48 मीटर जेवलिन थ्रो कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. उन्होंने लातविया के जिगिस्मंड सिरमायस के 84.69 मीटर के रिकॉर्ड को तोड़ा था. वह पहले भारतीय एथलीट हैं जिन्होंने किसी भी स्तर पर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है. वह पहले भारतीय एथलीट हैं, जिन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में किसी भी स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल किया. इससे पहले भारत ने डिस्कस थ्रो इवेंट में दो कांस्य पदक जीते थे. सीमा अंतिल ने 2002 में कांस्य पदक जीता था. उनका मुकाबला 10 अप्रैल को दोपहर 2.30 बजे होगा.

8.मैरी कॉम (बॉक्सिंग)

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भारतीय खेलों में मैरी कॉम ने एक खास मुकाम हासिल किया है. बीते साल नंवबर में जब उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था, तो जानकारों ने मैरी की इस उपलब्धि को शानदार कमबैक बताया. सीनियर खिलाड़ी ने फिलहाल कोई कॉमनवेल्थ मेडल नहीं जाता है, 35 साल की उम्र में इसकी कमी को पूरा करना चाहेंगी. 5 बार की वर्ल्ड चैंपियन और ओलिंपिक ब्रॉन्ड मेडलिस्ट मैरी कॉम एक बार फिर 48 किलोग्राम कैटिगरी में खेलने उतरेंगी. मुकाबला 6 अप्रैल को दोपहर 2 बजे होगा.

9.किदांबी श्रीकांत (बैडमिंटन)

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भारत के टॉप पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत ने कॉमनवेल्थ गेम्स को प्राथमिकता देते हुए हाल में कई अहम टूर्नमेंट में भाग नहीं लिया जिससे वह रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंच सकते थे. श्रीकांत का कहना है कि उनका लक्ष्य टूर्नमेंट क्वॉर्टफाइनल में पहुंचकर रैंकिंग अंक हासिल करने की जगह टूर्नमेंट जीत कर नंबर एक रैंकिंग हासिल करना है. वर्ल्ड रैंकिंग में तीसरे स्थान पर काबिज इस खिलाड़ी का कहना है कि उनके लिए कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में पदक जीतना ज्यादा जरूरी है. साल 2017 में प्रदर्शन शानदार रहा, चार सुपरसीरीज टाइटल अपने नाम किए. मुकाबला 12 अप्रैल को दोपहर एक बजे देख सकते हैं.
10. मेहुली घोष (शूटिंग)

mehuli ghosh
मेहुली घोष भी चुनौती देने के लिए तैयार है. यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स है और उनके हाल ही के प्रदर्शन को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह कोई बड़ा उलटफेर करने ही लौटेंगी. 2016 के बाद से मेहुली को शूटिंग स्टार के रूप में पहचान मिली, जब पुणे में हुए नेशनल चैंपियनशिप में दो गोल्ड और सात सिल्वर मेडल अपने नाम किए. इसके बाद से पश्चिम बंगाल की यह युवा निशानेबाज नहीं रूकी. 2017 में 61वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में मेहुली ने 8 गोल्ड मेडल पर निशाना लगाकर सनसनी फैला दी थी. हाल ही में मेक्सिको में हुए आईएसएसएफ विश्व कप में मेहुली ने 228.4 अंक हासिल कर विश्व जूनियर रिकॉर्ड बनाते हुए दो ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया और अब उनकर नजर सीनियर विश्व रिकॉर्ड बनाने पर है. उनका मुकाबला 9 अप्रैल को सुबह 4.30 पर होगा.