नई दिल्ली. विराट कोहली एंड कंपनी ने साउथ अफ्रीका में भारतीय क्रिकेट के नए इतिहास की इबारत लिखी है. टीम इंडिया ने प्रोटियाज सरजमीं पर 25 साल का सूखा खत्म करते हुए पहली वनडे सीरीज जीत दर्ज की. भारत की इस ऐतिहासिक जीत में सभी खिलाड़ियों का योगदान रहा. लेकिन कुछ फैक्टर्स ने इस बड़ी कामयाबी में निर्णायक भूमिका निभाई. आईए आपको बताते हैं ऐसे ही 3 बड़े फैक्टर के बारे में जिसने अफ्रीकी धरती पर टीम इंडिया के लिए पहली वनडे सीरीज जीत की जमीन तैयार की.

चहल-कुलदीप की फिरकी- चहल और कुलदीप को जोड़ियों में शिकार करना पसंद है. साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में ये दोनों ऐसा बखूबी करते दिखे हैं. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में ये दोनों अब तक 5 मुकाबलों में 30 विकेट चटका चुके हैं. बाइलेट्रल वनडे सीरीज में ये भारतीय स्पिनर्स का नया कीर्तिमान है. चहल ने वनडे सीरीज के 5 मुकाबलों में 14 विकेट झटके जबकि कुलदीप इतने ही मुकाबलों में 16 विकेट अपने नाम करने में सफल रहे हैं. ये साउथ अफ्रीका में खेली बाइलेट्रल वनडे सीरीज में किसी स्पिनर का सबसे बेहतर प्रदर्शन हैं. इनसे पहले साल 1998 में श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन ने एक सीरीज में 14 विकेट झटके थे. मौजूदा वनडे सीरीज में चहल जहां मुरली की बराबरी कर चुके हैं वहीं कुलदीप मुरलीधरन का रिकॉर्ड ब्रेक कर इस रेस में आगे निकल चुके हैं.

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दूसरे विकेट के बीच दमदार पार्टनरशिप- साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में अब तक भारतीय मिडिल ऑर्डर को हाथ खोलने का उतना मौका नहीं मिला है. इसकी सबसे बड़ी वजह है भारतीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों का शानदार प्रदर्शन उनके बीच की दमदार साझेदारी. भारत के लिए सबसे बेहतर साझेदारी दूसरे विकेट के लिए होती दिख रही है जो सीरीज दर सीरीज टीम की जीत की बेस तैयार कर रही है. फिर चाहे हो वो विराट और धवन की पार्टनरशिप हो या फिर रोहित और विराट के बीच की. ये बल्लेबाज हर सीरीज में अपने विरोधियों पर हावी दिखे हैं. साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में भारत के दूसरे विकेट के बीच की साझेदारी का औसत 130 के पार का रहा है, जो कि पिछले 5 वनडे सीरीज में दूसरे विकेट के लिए उसका सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है. खास बात ये है कि पिछली 5 वनडे सीरीज में से 4 में टीम इंडिया के दूसरे विकेट की पार्टनरशिप का औसत 100 प्लस का रहा है.

ऐतिहासिक सीरीज जीत में धोनी के नाम जुड़ी एक और बड़ी कामयाबी, ऐसा करने वाले बने पहले भारतीय क्रिकेटर

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धोनी है तो जीत है- भारत की सीरीज जीत में धोनी सबसे बड़ा फैक्टर है. धोनी बेशक बल्ले से अब तक कुछ खास कमाल नहीं कर सके हों लेकिन टीम में उनके साथ होने से ही ना सिर्फ कप्तान विराट कोहली की आधी टेंशन दूर हो जाती है बल्कि गेंदबाजों का भी काम आसान हो जाता है. सीरीज में अफ्रीकी बल्लेबाज जब-जब चहल और कुलदीप की फिरकी पर हावी होते दिखे, धोनी ने उन्हें उससे बाहर निकलने की रणनीति बताई. विकेट के पीछे खड़े होकर धोनी सिर्फ कीपिंग ही नहीं करते हैं बल्कि विरोधी बल्लेबाजों की स्ट्रेटजी को भी भांपने का काम करते हैं. धोनी की इसी खूबी का नतीजा है कि भारतीय गेंदबाज साउथ अफ्रीका में इतने सफल होते दिख रहे हैं. वनडे सीरीज में धोनी अब तक 5 शिकार कर चुके हैं, जिसमें 3 कैच और 2 स्टम्पिंग शामिल है.