नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर संघ के महासंघ (फिका) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि खिलाड़ी राष्ट्रीय अनुबंध के बजाय लोकप्रिय टी20 लीग के लुभावने अनुबंध को प्राथमिकता दे रहे हैं जिससे उच्च स्तर के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को खतरा पैदा हो रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे पारंपरिक क्रिकेट को खतरा पैदा हो गया है.

क्रिकइंफो के अनुसार फिका ने पुरुष पेशेवर क्रिकेटरों को लेकर वैश्विक रोजगार रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि वैकल्पिक रोजगार के कारण पारंपरिक ढांचे को गंभीर खतरा पैदा हो गया है. ये विकल्प नए बाजारॉ में उपलब्ध हैं और खिलाड़ियों ने विभिन्न टी20 लीग में खेलने के कारण उसके हिसाब से अपना खेल ढाल दिया है.

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300 क्रिकेटरों की ली राय

इस रिपोर्ट का शीर्षक ‘बदलते परिदृश्य’ है जो विश्व भर के 300 क्रिकेटरों की राय पर आधारित है. इनमें हालांकि भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ी शामिल नहीं हैं जहां खिलाड़ियों का संघ नहीं है. रिपोर्ट में कहा गया है, हम इस तरह के चलन की शुरुआत देख रहे हैं जिसमें विश्व भर में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल के सभी प्रारूपों में सालाना अनुबंध को नकारा जा रहा है. खिलाड़ी पारंपरिक प्रारूप के बजाय वह रास्ता अपना रहे हैं जहां वे अधिक आकर्षक करियर बना सकते हैं और इसमें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की गुणवत्ता और अहमियत को कम करने की क्षमता है. विश्व के चोटी के कई खिलाड़ी पहले ही नियमित तौर पर अपनी राष्ट्रीय टीमों से नहीं खेल रहे हैं.

टी 20 लीग की भरमार

बता दें कि भारत की घरेलू क्रिकेट लीग आईपीएल और ऑस्ट्रेलिया की लीग बिग बैश तो बडे़ पैमाने पर टूर्नामेंट का आयोजन करती ही है, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे देश भी अपने यहां घरेलू टी 20 लीग करवा रहे हैं जिसमें इंटरनेशनल खिलाड़ी शिरकत कर रहे हैं. खास तौर पर वेस्टइंडीज  की टीम के क्रिस गेल, कीरोन पोलार्ड, डैरेन सैमी जैसे टॉप क्रिकेटर पिछले कुछ समय से नेशनल टीम में नहीं बल्कि आईपीएल और विभिन्न  टी 20 लीग में ही खेल रहे हैं.

(भाषा इनपुट)