गोल्ड कोस्ट: भारतीय महिला हॉकी टीम ने अंतिम क्षणों में गोल करने के दो बेहतरीन मौके गंवाये जिसका खामियाजा उसे तीन बार के मौजूदा चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के हाथों गुरुवार को राष्ट्रमंडल खेलों के सेमीफाइनल में 0-1 की हार से चुकाना पड़ा. भारतीय टीम ग्रेस स्टीवर्ट के तीसरे क्वार्टर में किए गए गोल की बराबरी करने के लिए बेताब थी. जब मैच में चार मिनट बचे थे तब मुख्य कोच हरेंद्र सिंह ने गोलकीपर सविता पूनिया को बुलाकर उनकी जगह अग्रिम पंक्ति की खिलाड़ी को उतारा, लेकिन भारतीय टीम मौकों का फायदा उठाने में नाकाम रही.

नवनीत ने मोनिका के दायें छोर से दिए गए क्रॉस पर गोल करने का आसान मौका गंवाया जबकि रानी भी वंदना कटारिया के पास पर गेंद को गोल में नहीं भेज पाई. खेल अधिकतर भारतीय हाफ में ही होता रहा. ऑस्ट्रेलिया ने अधिकतर समय गेंद पर कब्जा जमाए रखा. भारत ने पहले क्वार्टर के शुरू में लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर बचाए. इसके बाद वंदना भी सर्किल के अंदर गेंद लेकर गई लेकिन उन्हें सहयोग नहीं मिला.

भारतीय रक्षापंक्ति ने अच्छा खेल दिखाया और ऑस्ट्रेलिया के आक्रामक तेवरों का करारा जवाब दिया. इस बीच ग्रेस स्टीवर्ट एक अवसर पर गोल करने से भी चूकी. भारतीय गोलकीपर सविता ने दूसरे क्वार्टर में अच्छा बचाव भी किया. इस बीच नवनीत को पीला कार्ड मिला जिसके कारण पांच मिनट तक भारतीय टीम दस खिलाड़ियों के साथ खेली.

ऑस्ट्रेलिया ने आक्रमण जारी रखा, लेकिन वह भारतीय रक्षकों की मजबूत दीवार को भेदने में नाकाम रहा. उसे तीसरे क्वार्टर में मैच का तीसरा पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन दीप ग्रेस एक्का ने इसे नाकाम कर दिया. स्टीवर्ट ने क्रॉस पर करारा शॉट जमाकर मैच का एकमात्र गोल किया. भारत को चौथे क्वार्टर में लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन वह उनका फायदा नहीं उठा पाया. इसके बाद भी उसे पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन इस बार भी भारतीय खिलाड़ी चूक गई.

भारत अब कांस्य पदक के मुकाबले के लिये इंग्लैंड से भिड़ेगा. कोच हरेंद्र मैच के बाद हालांकि हार से बहुत दुखी नहीं थे. उन्होंने कहा, ‘‘ हम हार गए लेकिन हम खराब नहीं खेले. ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम के खिलाफ उसकी घरेलू सरजमीं पर 1-0 का परिणाम खराब नहीं है. हम पिछले दो खेलों में पांचवें स्थान पर रहे थे. इसलिए इस बार पदक जीतना अच्छा रहेगा. देखते हैं कि यहां से क्या होता है.’’