कोलकाता नाइटराइडर्स की टीम दूसरे क्वॉलिफायर में मुंबई इंडियंस से 6 विकेट से हारकर आईपीएल की खिताबी दौड़ से बाहर हो गई. कोलकाता की टीम का क्वॉलिफायर में प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा और वह 107 रन बनाकर ऑल आउट हो गई और मुंबई ने 33 गेंदें बाकी रहते ही मैच आसानी से अपने नाम कर लिया. आइए एक नजर डालें इस सीजन में कोलकाता के प्रदर्शन पर.

इस आईपीएल में कोलकाता का प्रदर्शन
कोलकाता की टीम का प्रदर्शन शुरुआती मैचों में बेहद शानदार रहा और उसने अपने पहले 9 में से 7 मैच जीतते हुए पॉइंट्स टेबल में टॉप पर जगह बना ली थी. लेकिन अपने आखिरी 5 मैचों में से कोलकाता की टीम सिर्फ एक मैच जीत पाई औरर पॉइंट्स टेबल में चौथे स्थान पर रही. इस वजह से उसे क्वॉलिफायर में दो बार खेलने का मौका भी नहीं मिल पाया.

यानी कि कोलकाता के प्रदर्शन में निरंतरता का अभाव दिखा. शुरुआत में तो उसने अच्छी लय पकड़ी लेकिन बाद में लक्ष्य से भटक गई. एलिमिनेटर में उसने जरूर वर्षा प्रभावित मैच में हैदराबाद को 7 विकेट से हराया लेकिन दूसरे क्वॉलिफायर में वह मुंबई के खिलाफ एक बार फइर से पूरी तरह बेरंग नजर आई.

कोलकाता के लिए जो बातें अच्छी रहीं
इस सीजन में कोलकाता के टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों क्रिस लिन, गौतम गंभीर, सुनील नारायण और रॉबिन उथप्पा ने अच्छी बल्लेबाजी की. यही वजह रही कि कोलकाता की टीम इस सीजन में पावरप्ले में 9.39 के धमाकेदार रन रेट से रन बनाए.

गौतम गंभीर इस सीजन में कोलकाता के लिए 16 मैचों में 498 रन बनाकर सबसे कामयाब बल्लेबाज रहे. इसके अलावा कोलकाता के लिए क्रिस लिन ने भी धमाकेदार बल्लेबाजी की और सिर्फ 7 मैचों में ही 295 रन बनाए. सुनील नारायण ने महज 15 गेदों पर हाफ सेंचुरी ठोकी जोकि आईपीएल के इतिहास की संयुक्त सबसे तेज हाफ सेंचुरी है. कोलकाता ने आरसीबी को महज 49 रन पर समेट दिया जोकि आईपीएल में किसी भी टीम का सबसे कम स्कोर है.

सुनील नारायण को ओपनर बनाना कोलकाता को महंगा पड़ा! (bcci)
सुनील नारायण को ओपनर बनाना कोलकाता को महंगा पड़ा! (bcci)

 

इस आईपीएल में कोलकाता के लिए अब तक सबसे सफल रहने वाले स्पिनरों के उलट तेज गेंदबाजों का जलवा रहा और क्रिस वोक्स (17), उमेश यादव (17) और नाथन कॉल्टर नाइल (15) उसके तीन सबसे कामयाब गेंदबाज रहे.

कोलकाता के खिलाफ गईं जो चीजें
सुनील नारायण को ओपनर के तौर पर उतारना कोलकाता का सबसे बड़ा जुआ था जो कुछ मैचों में सफल भी रहा लेकिन इससे कोलकाता को नुकसान ज्यादा हुआ. इस वजह से उनके बैटिंग ऑर्डर में कंफ्यूजन पैदा हो गया और रॉबिन उथप्पा जैसे बल्लेबाज की बाद के मैचों में नाकामी की वजह बना. क्रिस लिन के चोटिल होने पर कोलकाता ने नारायण को ओपनर बनाया था लेकिन लिन के लौटन के बाद भी ये प्रयोग जारी रखा. इससे उथप्पा तीसरे से चौथे नंबर पर खिसक गए और गंभीर का बैटिंग ऑर्डर भी नीचे खिसक गया, जिसका कोलकाता को खामियाजा उठाना पड़ा.

नारायण को बैटिंग में जो थोड़ी बहुत सफलता मिली उसे उनकी गेंदबाजी में नाकामयाबी ने पूरी तरह धो दिया. कोलकाता के लिए आखिरी 9 मैचों में से 5 में तो वह कोई विकेट ही नहीं ले सके, जबकि वह उनके मैच विनिंग गेंदबाज माने जाते हैं.

ऑलराउंडर आंद्रे रसेल डोपिंग बैन के कारण खेल नहीं सके जबकि यूसुफ पठान और कोलिन डि ग्रैंडहोम गेंद और बल्ले से पूरी तरह नाकाम रहे. इसके अलावा क्रिस लिन और रॉबिन उथप्पा का महत्वपूर्ण अवसरों पर चोटिल होना भी कोलकाता को भारी पड़ा.